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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७५४

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सहस सहस - वि० दे० "सहस्र" । सहसकिरन - संज्ञा पुं० सूर्य्यं । सहसा -अव्य० एकाएक । अचानक सहसाखी -संज्ञा पुं० इंद्र | सहसासन - संज्ञा पुं० शेषनाग | सहस्र - वि० जो गिनती में दस से हो। सहस्रकर-संज्ञा पुं० सूर्य्य । सहस्रकिरण - संज्ञा पुं० सूर्य्य । सहस्रदल - संज्ञा पुं० पद्म । कमल । सहस्रनाम - संथा पुं० वह स्तोत्र जिस में किसी देवता के हज़ार नाम हों । सहस्रनेत्र - संज्ञा पुं० इंद्र | सहस्रपाद - संज्ञा पुं० १. सूर्य्यं । २. विष्णु । ३. सारस पक्षी । सहस्रबाहु - संज्ञा पुं० १. शिव । २. कार्त्तवीर्यार्जुन । राजा कृतवीर्य का पुत्र । सहस्रभुजा -संज्ञा स्त्री० देवी का एक रूप । सहस्ररश्मि-संज्ञा पुं० सूर्य्य । सहस्रशीर्ष-संश पुं० विष्णु । सहस्राक्ष-संज्ञा पुं० १. इंद्र । २. विष्णु | सहाइ, सहाई -संज्ञा पुं० सहायक । मददगार । GPS संज्ञा स्त्री० सहायता । मदद । सहाध्यायी - संज्ञा पुं० दे० " सहपाठी" । सहानुभूति-संज्ञा बी० हमदर्दो । सहाय -संज्ञा पुं० मदद | सहायक - वि० सहायता करनेवाला । मददगार । सहायता - संज्ञा स्त्री० किसी के कार्य में शारीरिक या और किसी प्रकार का योग देना । मदद । सहावी-संज्ञा पुं० मददगार सख सहारा - संज्ञा पुं० मदद। सहिजन-संज्ञा पुं० एक प्रकार का बड़ा वृक्ष जिसकी लंबी फलियों की तरकारी होती है। शोभांजन । मुनगा । सहित भव्य० समेत । सँग । सहिदानः +- संज्ञा पुं० दे० "सहि- दानी" । सहिदानी | -संज्ञा स्त्री० चिह्न। पह- चान । | सहिष्णु - वि० सहनशील । सहिष्णुता - संज्ञा स्त्री० सहनशीलता । सही - वि० १. सत्य । प्रामाणिक । सच | २. सही-सलामत - वि० १. श्रारोग्य | २. जिसमें कोई दोष या न्यूनता न आई हो । सहूलियत - संज्ञा स्त्री० १. आसानी । २ श्रश्व । सहदय - वि० १ जो दूसरे के दुःख- सुख श्रादि समझता हो । २. दयालु । ३ रसिक । सहेजना - क्रि० स० अच्छी तरह कह- सुनकर सपुर्द करना । सहेजवाना- कि० स० सहेजने का काम दूसरे से कराना । सहेतुक - वि० जिसका कुछ हेतु, उद्देश्य या मतलब हो । सहेली -मशा स्त्री० १. साथ में रहने- वाला स्त्री । संगिनी । २. दासी । सहैया - वि० सहन करनेवाला । सहोदर - संज्ञा पुं० १. एक ही माता के उदर से उत्पन्न संतान । २. सगा । सह्य-संज्ञा पुं० दे० "सह्याद्रि" ।