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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७६३

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साहाय्य - हो । हिम्मती । दिलेर । साहाय्य-संज्ञा पुं० सहायता । साहि मा पुं० राजा । साहित्य-संज्ञा १० १. एकत्र होना । मिना । २. गद्य और पद्य सब प्रकार के उन ग्रंथों का समूह जिनमें सार्वजनीन हिन संबंधी स्थायी वेवार रक्षिते हैं । वाङमय । साहित्यिक - वि० साहित्य-संबंधी । सशा ५० साहित्य सेवी । साहित्र - मज्ञा १० दे० "साहब" | साही -सज्ञा स्त्री० एक प्रसिद्ध जंतु रेज की पी5 पर नुकीले कांटे होते हैं । साहु-मंज्ञा पुं० १. सज्जन । २. महा- जन | माहूकार 1 साहूकार - सज्ञा पुं० बड़ा महाजन या व्यापाती। साहूकारा-मना पुं० रुपयों का लेन- देन । महाजनी | साहूकारी - नशा बो० साहूकार होने का भान साहब - संज्ञा पु० दे० "साहब" | सिउँ 1 :- प्रत्य० दे० "स्यों" । - सिंकना कि० भ० श्रांच पर गरम होना या पकना । सिंगा - संज्ञा पु० तुरही । रणसिंगा । ( वाद्य ) सिंगार -संज्ञा पुं० १. सजावट । २० शोभा । सिंगारदान -संज्ञा पुं० वह छोटा संदकु जिसमें शीशा, कंधी आदि गार की सामग्री रखी जाती है। सिंगारना - क्रि० स० सुसज्जित करना । सिगारहाट-संज्ञा स्त्री० वेश्याओं के ७५५ सिंचाई रहने का स्थान । चकला । सिंगारहार-संज्ञा पुं० हरसिंगार नाम फूल । परजाता । सिंगारिया - वि० देवमूर्ति का सिंगार करनवाला पुजारी | सिंगारी - वि० पुं० शृंगार करनेवाला । सजानेवाला । सिंगिया - संज्ञा पुं० एक प्रसिद्ध स्थावर विष । सिंगी-संज्ञा पुं० फूँककर बजाया जाने- वाला सींग का एक बाजा । संज्ञा स्त्री० १. एक प्रकार की मछती । २. सींग की नली जिनसे देहाती ज़र्राह शरीर का रक्त चूसकर निका- लते हैं सिंगटी -संज्ञा खी० १. बैल के सींग पर पहनाने का एक आभूषण । २. सि दूर, कंत्री आदि रखने की स्त्रियों की पिटारी । सिंघा - संज्ञा पुं० दे० "सि ंह" । सिंघल-संशा पु० दे० "सिंहज़" । सिंघाड़ा - संज्ञा पुं० १. पानी में फैचने- वाली एक लता जिसके तिकोने फज खाए जाते हैं । २. एक नमकीन पकवान । सिंघासन -संज्ञा पुं० दे० "सिंहासन" | सिंधी संघा बी० १. एक प्रकार की छोटी मछली । २. सोंठ । सिंघेला -संज्ञा पुं० शेर का बच्चा । सिंचन -संज्ञा पुं० [वि० सिंचित ] जल छिड़कना । सींचना । सिंचना- क्रि० म० सींचा जाना । सिंचाई- सिंचाई -संज्ञा स्त्री० १. १. सींचने का काम । २. सीचने का कर या मज़दूरी ।