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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/७८२

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सूक्ष्म कथन । सूक्ष्म - वि० १. बहुत छोटा । बारीक या महीन । २. संज्ञा पुं० १. परमाणु । २. परब्रह्म । सूक्ष्मता - संज्ञा स्त्री० सूक्ष्म होने का भाव । बारीकी । महीनपन । सूक्ष्मदर्शक यंत्र - संज्ञा पुं० एक यंत्र जिससे देखने पर सूक्ष्म पदार्थ बड़े दिखाई देते हैं । खुर्दबीन । सूक्ष्मदर्शिता - संज्ञा स्त्री० सूक्ष्म या बारीक बात सोचने-समझने का गुण । सूक्ष्मदर्शी - वि० बारीक बात को सोचने-समझनेवाला । कुशाग्रबुद्धि । सूक्ष्मदृष्टि-संज्ञा त्रो० वह दृष्टि जिससे बहुत ही सूक्ष्म बातें भी समझ मे झा जाय । संज्ञा पुं० दे० " सूक्ष्मदर्शी" । सूक्ष्म शरीर-संज्ञा पुं० पाँच प्राण, पांच ज्ञानेंद्रियां, पांच सूक्ष्म भूत, मन और बुद्धि इन सत्रह तत्वों का समूह | सूख 1-वि० दे० " सूखा" । सूखना- क्रि० प्र० १. नमी या तरी का निकल जाना । रसहीन होना। २. जल का न रहना या कम हो जाना । ३. दुबला होना । सूखा - वि० १. जिसका पानी निकल, उड़ या जल गया हो । २. तेज- रहित । संज्ञा पुं० पानी न बरसना । अनावृष्टि । सूचक - वि० सूचना देनेवाला । बताने- बाबा । संज्ञा पुं० १. सूई । २. सीनेवाला । सूचना-संज्ञा श्री० १. वह बात जो 1 ७७४ सूत किसी को बताने, अताने या साथ- धान करने के लिये कही आय । विज्ञापन । २. इश्तहार । सूचनापत्र - संग पुं० विज्ञापन । सूचिका - संज्ञा खी० सूई । सूचिकाभरण - सथा पुं० एक प्रकार की औषध जो सन्निपात श्रादि प्राणनाशक रोगों की अंतिम औषध मानी गई है । सूचित - वि० जिसकी सूचना दी गई हो । जताया हुआ । सूचीकर्म-संज्ञा पुं० सिलाई का काम | सूचीपत्र - संज्ञा पुं० तालिका। फेहरिस्त । सूची । सृष्टिम० - वि० दे० " सूक्ष्म" । सूजन-संज्ञा खी० सूजने की क्रिया या भाव । सृजना- क्रि० प्र० रोग, चोट श्रादि के कारण शरीर के किसी अंग का फुलना । शोथ होना । सूजा - सज्ञा पुं० बड़ी मोटी सूई । सूद्मा । सूज्ञाक - संज्ञा पुं० मूनेंद्रिय का एक प्रदाहयुक्त रोग | सूजी-संज्ञा स्त्री० १. गेहूँ का दरदरा घाटा जिससे पकवान बनाते हैं । २. सूई । सूझ-संज्ञा श्री ० १ सूमने का भाव । २. दृष्टि । सूझना- क्रि० नज़र थाना | प्र० दिखाई देना । सूत - संज्ञा पुं० १. रुई, रेशम आदि का महीन तार जिससे कपड़ा बुना जाता है। सूता । ३. सागा । डोरा सूत्र । ३. दे० "सुत" । ।