सूतक सूतक -संज्ञा पुं० १. जन्म । २. वह अशौच जो संतान होने या किसी के मरने पर परिवारवालों को होता है । सृतकी - वि० परिवार में किसी की मृत्यु या जन्म होने के कारण जिसे सूतक लगा हो । सूतना + क्रि० प्र० दे० "सोना" । सूतपुत्र- संज्ञा पुं० १. सारथि । २. कर्ण । सता-संज्ञा पुं० तंतु । सूत । सति-संज्ञा बी० १. जन्म । २. प्रसव जनन । सतिका - संज्ञा स्त्री० वह स्त्री जिसने अभी हाल में बच्चा जना हो । ज़चा । सतिकागार, सतिकागृह - संज्ञा पुं० सौरी । प्रसव-गृह | सती-संज्ञा स्त्री० सीपी | सत्र - संज्ञा पुं० १ सूत । तागा । डोरा । २. यज्ञोपवीत । जनेऊ । ३. थोड़े अक्षरों या शब्दों में कहा हुआ ऐसा पद या वचन जो बहुत अर्थ प्रकट करे । स त्रकार-संज्ञा पुं० १. वह जिसने सूत्रों की रचना की हो । सूत्र-रच- यिता । २. बढ़ई । ३ जुलाहा । समय-संज्ञा पुं० वह ग्रंथ जो सूत्रों में हो; जसे सांख्यसूत्र | - • स त्रधार - संज्ञा पुं० नाट्यशाला का व्यवस्थापक | स त्रपात -संज्ञा पुं० प्रारंभ | शुरू | सथनी-संज्ञा श्री० पायजामा | स दे-संज्ञा पुं० १. बाभ। २. व्याज । ७७५ सूरज सदन - वि० विनाश करनेवाला । सधा-वि० दे० "सीधा" । स धे-क्रि० वि० सीधे से । सन-संज्ञा पुं० २. कली । ४. पुत्र । जनन । १. प्रसव । कलिका । ३. फूल । +सा पुं० वि० दे० "शून्य" । सना - वि० सुनसान संज्ञा पुं० एकांत । निर्जन स्थान | संज्ञा स्त्री पुत्री । बेटी । सनापन - संज्ञा पुं० सन्नाटा | स नु-संज्ञा पुं० पुत्र । संतान । सप-संज्ञा पु० मइया । संज्ञा पु० अनाज फटकने का सरई या सींक का छाज | स पकार-संज्ञा पुं० मइया पाचक | सपनखा - संज्ञा स्त्री० दे० " शूर्पणखा " | स पशास्त्र - संज्ञा पुं० पाकशास्त्र | सफ-संज्ञा पुं० पश्म । ऊन् । स फो- संज्ञा पुं० मुसलमानों का एक धार्मिक उदार संप्रदाय | सबा -संज्ञा पुं० किसी देश का कोई भाग । प्रांत । a सबेदार - संज्ञा पुं० १. किसी सूबे या प्रात का शासक । २. एक छोटा फौजी ओहदा । सबेदारी-संज्ञा स्त्री० सूबेदार का श्रीहदा या पद । सम - वि० कंजूस । सर-संज्ञा पुं० अंधा । a संज्ञा पुं० वीर । बहादुर । संज्ञा पुं० दे० "शुल" स रकुमार - संज्ञा पुं० वसुदेव । सरेज- संज्ञा पुं० १. सूर्य । २. दे० " सूरदास" /
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