६ इ-संस्कृत या हिंदी वर्णमाला का तैंतीसव और अंतिम व्यंजन | हकड़ना - क्रि० प्र० दर्प के साथ बोलना । ललकारना । हकारना - क्रि० स० १. हाँक देकर बुलाना । २. पुकारना । हॅकवा - संज्ञा पुं० शेर के शिकार का एक ढंग जिसमें बहुत से लोग शेर को हाँककर शिकारी की जाते हैं । हँकचाना - क्रि० स० १. हाँक लग- वाना। २. हाँकने का काम दूसरे से कराना । भोर ले हँकवैयाः +-संज्ञा पुं० हकिनेवाला । हँकाई -संज्ञा स्त्री० हाँकने की क्रिया, भाव या मज़दूरी । हुँकाना - कि० स० पुकारना । बुलाना । हँकार-संज्ञा स्त्री० १. भावाज़ लगाकर बुलाना । २. पुकार । हंकार - संज्ञा पुं० दे० १. " श्रहं कार" । २. ललकार । हँकारना - क्रि० स० १. ज़ोर से पुका- रना । २. ललकारना । हकारी - संज्ञा पुं० दूत | हंगामा - संज्ञा पुं० १. उपद्रव । लड़ाई- मगड़ा । २. हल्ला | हंडा - संज्ञा पुं० पीतल या तांबे का बहुत बड़ा बरतन जिसमें पानी रखते हँडिया - संज्ञा स्त्री० बड़े लेटे के धाकार का मिट्टी का बरतन । होडी । इंडी-संशा बी० दे० "हँडिया", "हाँडी" । ७६३ ह हँसली हंत-अव्य० खेद या शेोकसूचक शब्द । हंता-संज्ञा पुं० [ श्री० इंत्री ] वध करनेवाला । हँफनि-संज्ञा खी० इफिने की क्रिया या भाव । हंस - संज्ञा पुं० १. बत्तख़ के श्राकार - का एक जलपक्षी जो बड़ी बड़ी झीलों में रहता है । २. जीवात्मा । हंसक-संज्ञा पुं० १. हंस पक्षी । २. पैर की उँगलियों में पहनने का बिछुधा । हंसगति-संज्ञा स्त्री० हंस के समान सुदर धीमी चाल । हंसगामिनी - वि० स्त्री० हंस के समान सुदर मंद गति से चलनेवाली । हँसता- मुखी -संज्ञा पुं० हँसते चेहरे- वाला । प्रसन्नमुख । हँसन- संज्ञा स्त्री० हँसने की क्रिया । हँसना- क्रि० प्र० खुशी के मारे मुँह फैलाकर आवाज़ करना । खिल- खिलाना । क्रि० स० किसी का उपहास करना । अनादर करना । - हँसनि-संज्ञा स्त्री० दे० "हँसन" । हंसनी - संज्ञा स्त्री० दे० " हंसी" । हंसपदी संज्ञा स्त्री० एक लता । हँसमुख - वि० १. प्रसन्नवदन । २. विनेदशील । हंसराज - संज्ञा पुं० १. एक प्रकार की पहाड़ी बूटी । २. एक प्रकार का अगहनी धान | हँसती-संज्ञा बी० गले में पहनने का स्त्रियों का एक मंडलाकार गहना ।
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