हंसवंश हंसवंश - संज्ञा पुं० सूर्य वंश । हंसवाहन - संज्ञा पुं० ब्रह्मा । हंसवाहिनी - संज्ञा बी० सरस्वती । हंससुता-संज्ञा श्री० यमुना नदी । हँसाई -संज्ञा बी० १. हँसने की क्रिया या भाव । २. निंदा । हँसाना - क्रि० स० दूसरे को हँसने में प्रवृत्त करना । हंसालि -संज्ञा श्री० ३७ मात्राओं का एक छंद । हंसिनी -संज्ञा स्त्री० दे० "हंसी" । हँसिया - संज्ञा बी० एक औज़ार जिससे खेत की फसल या तरकारी आदि काटी जाती है । हंसी-संज्ञा बी० हंस की मादा । हँसी - संज्ञा स्त्री० १. हँसने की क्रिया या भाव । २. मज़ाक़ । दिल्लगी । ३. उपहासु । ४. बदनामी । हसुश्रा, हसुवा - संक्षा पुं० दे० । "हॅसिया" । हँसोड़ - वि० हँसी-ठट्ठा करनेवाला | दिल्लगीवाज़ । हँसी हाँक - वि० [स्त्री० हँसाई ] कुछ हँसी लिए । २. हँसने स्वभाव रखनेवाला । हउँ - क्रि० प्र०, सर्व० दे० " है।" । हक - वि० १. सत्य । २. उचित । । १. का संज्ञा पुं० १. स्वत्व | २. वह वस्तु जिसे पाने, पास रखने या काम में खाने का न्याय से अधिकार प्राप्त हो । ३. खुदा । ईश्वर । ( मुसल- मान ) हक़दार - संज्ञा पुं० स्वत्व या अधिकार रखनेवाला । इक नाहक - मव्य० १. जबरदसी । B हजामत धींगा-धींगी से । २. व्यर्थ । हकबकाना- क्रि० प्र० घबरा जाना । हकला - वि० रुकरुक कर बोलनेवाला । हकलाना- क्रि० प्र० बोलने में घट- कना । रुक रुककर बोलना । हकसफा-संगा पुं० किसी ज़मीन को खरीदने का औरों से ऊपर या अधिक वह हक जो गाँव के हिस्से- दारों अथवा पड़ोसियों को प्राप्त होता है । हकीकत- संज्ञा खी० १. तत्त्व | सच्चाई । २. असल हाल हकीम - संज्ञा पुं० यूनानी रीति से चिकित्सा करनेवाला । वैद्य । हकीमी-संशा खी० १. यूनानी चिकि- रसा शास्त्र । २. हकीम का पेशा या काम । हक्का-बक्का - वि० भौचक । ठक । हगना- क्रि० प्र० मलत्याग करना । पाखाना फिरना । हगाना - क्रि० स० हगने की क्रिया कराना । हगास-संश स्त्री० मतस्याग का वेग या इच्छा । हचकोला - संज्ञा पुं० वह धक्का जो गाड़ी, चारपाई आदि पर हिलने- डालने से लगे । हज-संज्ञा पुं० मुसलमानों का काबे के दर्शन के लिये मक्के जाना । हज़म - संज्ञा पुं० पाचन बि० पेट में पचा हुआ । हज़रत -संज्ञा पुं० १. महात्मा । महा- पुरुष । २. नटखट या खोटा आदमी । ( व्यंग्य ) . हजामत -संज्ञा स्त्री० १ हजाम का काम । २. सिर या दाढ़ी के बढ़े हुए
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