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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/८०८

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हरि । नैराश्य । नाउम्मेदी । हरि - संज्ञा पुं० १. विष्णु । २. घोड़ा। ३. बंदर | ४. विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण । हरिश्रर - वि० हरा । सब्ज़ । हरिश्ररी | संज्ञा स्त्री० दे० "हरि- भाली" । हरियाली - संज्ञा स्त्री० घास और पेड़- पौधों का फैला हुआ समूह | हरिकीर्तन -संज्ञा पुं० भगवान् या उनके अवतारों की स्तुति का गान । हरिचंद - संचा पुं० दे० "हरिश्चंद्र” । हरिजन - संज्ञा पुं० १. ईश्वर का भक्त । २. अंत्यज । ( आधुनिक ) हरिण - संज्ञा पुं० [स्त्री० हरिणी] मृग । हिरन । हरिणाक्षी - वि० स्त्री० हिरन की आँखों के समान सुंदर खींवाली । सुंदरी । हरिणी - संज्ञा स्त्री० हिरन की मादा । हरित, हरित - वि० हरा । सब्ज़ | हरितमणि - संज्ञा पुं० मरकत । पचा। स्त्री० हरितालिका- संथा बी० भादों के शुक्ल पक्ष की तृतीया । तीज। (स्त्रियों का व्रत ) हरिद्रा - संज्ञा खो० हलदी । हरिद्वार-संज्ञा पुं० एक प्रसिद्ध तीर्थ जहाँ से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है । हरिधाम - संज्ञा पुं० वैकुंठ । हरिन - संज्ञा पुं० [स्त्री० इरिनी ] खुर और सींगवाला एक चौपाया जो प्रायः सुनसान मैदानों, जंगलों और पहाड़ों में रहता है । मृग । हरिनग - संज्ञा पुं० सर्प का मणि । हरिनाक्ष-संज्ञा पुं० दे० " हिरण्याच" । , ८०० हरीरा । हरिनाम - संज्ञा पुं० भगवान् का नाम । हरिनी-संज्ञा स्त्री० स्त्री जाति का मृग । हरिपद-संज्ञा पुं० विष्णु का लोक । वैकुंठ | हरिपुर - संथा पुं० वैकुंठ । हरिप्रिया - संज्ञा जी० १. लक्ष्मी । २. तुलसी । हरिप्रीता - संज्ञा श्री० एक प्रकार का शुभ मुहूर्त । (ज्योतिष) हरिभक्त-संज्ञा पुं० ईश्वर का प्रेमी । हरिभक्ति - संज्ञा स्त्री० ईश्वर-प्रेम | हरियर - वि० दे० "हरा" । हरियाई +- संज्ञा स्त्री० दे० "हरियाली" | हरियाना - सा पुं० हिसार और रोह- तक के श्रास-पास का प्रांत । हरियाली - संज्ञा स्त्री० १. हरे रंग का फैलाव । २. हरे हरे पेड़-पौधों का समूह या विस्तार । ३. दूब । हरिवंश - संज्ञा पुं० एक ग्रंथ जिसमें कृष्ण तथा उनके कुल के यादवों का वृतांत है । हरिवासर - संज्ञा पुं० १. रविवार । २. विष्णु का दिन एकादशी । हरिशयनी - संज्ञा स्त्री० एकादशी । हरिश्चंद्र- संज्ञा श्राषाढ़ शुक्ल पुं० सूर्य्यवंश का प्रसिद्ध दानी और सत्यव्रती राजा । हरिस-संज्ञा स्त्री० हल का वह लट्ठा जिसके एक छोर पर फालवाली लकड़ी और दूसरे छोर पर जूवा रहता है। ईषा । हरिहर क्षेत्र -संज्ञा पुं० बिहार में एक तीर्थस्थान जहाँ कार्त्तिक पूर्णिमा को भारी मेला होता है । हरीतकी संज्ञा बी० हड़ । हरें । - श्री० हरीरा -संज्ञा पुं० एक प्रकार का पेय 1