हरुन पदार्थ जो दूध में मसाले और मेवे डालकर औटाने से बनता है । हरु - वि० हलका | हरुआ - वि० दे० " हलका " । हरुभाई | संज्ञा श्री० १. हलकापन | २. फुरती । हरुश्राना+- क्रि० प्र० १. हलका २. फुरती करना । होना । हरुप + - क्रि० वि० धीरे धीरे । श्रा- हिता से । हरूफ - संज्ञा पुं० अक्षर । हरे- क्रि० वि० धीरे से । श्राहिस्ता से । मंद । हरेव - संज्ञा पुं० मंगोलों का देश । हरेवा - संज्ञा पुं० हरे रंग की एक चिड़िया । हरी बुलबुल । हरौल - संज्ञा पुं० दे० " हरावल " । हर्ज संज्ञा पुं० काम में रुकावट । बाधा । अड़चन । हर्ता - संज्ञा पुं० [स्त्री० दत्रीं ] हरण करनेवाला । हर्फ - संज्ञा पुं० दे० "हरकु" । हर-संज्ञा स्त्री० दे० "हड़” । हरे-संज्ञा खो० दे० "हद" । २. हर्ष - संज्ञा पुं० १. प्रफुल्लता या भय के कारण रोगों का खड़ा होना । खुशी । हर्षण - संज्ञा पुं० प्रफुल्लता या भय से रोंगटों का खड़ा होना । हर्षवर्द्धन - संज्ञा पुं० भारत का वैस क्षत्रिय वंशी एक बौद्ध सम्राट जि- सकी सभा में बाय कवि रहते थे । हर्षाना- क्रि० प्र० प्रानंदित होना । प्रसन्न होना । ८०१ कि० स० हर्षित करना । हर्षित - वि० आनंदित | हल - संज्ञा पुं० शुद्ध व्यंजन जिसमें स्वर न मिला हो । हलंत - संज्ञा पुं० दे० "हल" । हल - संज्ञा पुं० १. वह धौज़ार जिससे ज़मीन जोती जाती है। सीर । २. गणित करना । ३. किसी समस्या का समाधान | २. हलकंप - संज्ञा पुं० १. हलचल । चारों ओर फैली हुई घबराहट । हलक़ - मज्ञा पुं० गले की नली । कंठ | हलकई| संज्ञा खी० १ हलकापन | २ ठी । • हलकना - कि० अ० १. छलकना । २ हिलोरे लेना । हलका - वि० [स्त्री० इलकी ] १. जो तौल में भारी न हो । २. जो गहरा या चटकीला न हो । ३. घटिया । हलका - संज्ञा पुं० १. मंडल | गोलाई । २ घेरा । ३. कई गांवों या कसबे का समूह जो किसी काम के लिये नियत हो । हलकान - वि० दे० " हैरान" । हलकाना - कि० अ० हलका होना । बोझ कम होना । क्रि० स० हिलेरा देना । हलकापन - संज्ञा पुं० हलका होने का भाव । लघुता । हलकारा | - संज्ञा पुं० दे० " हरकारा "। हलकोरा -संज्ञा पुं० तरंग लहर । हलचल - संज्ञा स्त्री० लोगों के बीच फैली हुई अधीरता, घबराहट, दौड़- धूप, शोर-गुल आादि । खलबली । धूम ।
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