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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/८१६

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हिचकी हिचकी - संज्ञा स्त्री० १. पेट की वायु का भोंक के साथ ऊपर चढ़कर कंठ में धक्का देते हुए निकलना । २. रह रहकर सिसकने का शब्द । हिजड़ा-संज्ञा पुं० दे० " हीजड़ा" । हिजरी - संज्ञा पुं० मुसलमानी सन् या संवत् जो मुहम्मद साहब के मक्के से मदीने भागने की तारीख़ ( १५ जूलाई सन् ६२२ ई० ) 1 हिज्जे-संज्ञा पुं० किसी शब्द में आए अक्षरों को मात्राओं सहित कहना । हिज्र -संज्ञा पुं० जुदाई । वियोग | हिडिंब -संज्ञा पुं० एक राक्षस जिसे भीम ने पांडवों के वनवास के समय मारा था । हिडवा-संज्ञा स्त्री० हिडिंब राक्षस की बहिन जिसके साथ भीम ने विवाह किया था । हित- वि० भलाई करने या चाहने - बाला । संज्ञा पुं० १. लाभ । २. कल्याण । ३. प्रेम । अव्य० ( किसी के ) लाभ के हेतु । हितकर, हितकारक - संज्ञा पुं० भलाई करनेवाला | हितकारी - वि० दे० " हितकर" । हितचिंतक - संज्ञा पुं० भला चाहने वाला | खैरखाह | हितचिंतन - संज्ञा पुं० किसी की भलाई की कामना या इच्छा । हितवादी - वि० हित की बात कहने- वाला । हिताई -संज्ञा सी० नाता | रिश्ता | हिताना - क्रि० प्र० १. हितकारी - - ८०८ होना । हिमवान् २. प्रेमयुक्त होना । ३. प्यारा या श्रच्छा लगना । हिताहित-संज्ञा पुं० भलाई - बुराई । लाभ-हानि । नफा-नुकसान | हिती, हितू संथा पुं० १. भलाई करने या चाहनेवाला । खैरखाह । २ संबंधी । ३. स्नेही । हितैषिता - संज्ञा स्त्री० भले ई चाहने की वृत्ति । हितैषी - वि० भत्ता चाहनेवाला । हिदायत - संज्ञा स्त्री० अधिकारी की शिक्षा | श्रादेश | निर्देश | हिनहिनाना- क्रि० प्र० घोड़े का बोलना । हसना । हिना - संज्ञा बी० मेंहदी । हिफाज़त-संज्ञा स्त्री० किसी वस्तु को इस प्रकार रखना कि वह नष्ट न होने पावे । रक्षा । हिमंचल-संज्ञा पुं० दे० "हिमा- चल" । हिमंता:- संज्ञा पुं० दे० " हेमंत" । हिम-संज्ञा पुं० १. पाला । ब । २. जाड़ा । ३. जाड़े की ऋतु । वि० टंढा । सर्द | हिम-उपल-संज्ञा पुं० श्रोता । पत्थर । हिमकण - संथा पुं० बर्फ़ या पाले के महीन टुकड़े । हिमकर-संज्ञ पुं० चंद्रमा । हिमकिरण-संज्ञा पुं० चंद्रमा । हिमयानी -संज्ञा स्त्री० रुपया पैसा रखने की जालीदार लंबी थैली जो कमर में बांधी जाती है । हिमवत्-संज्ञा पुं० दे० "हिमवान्" । हिमवान - वि० बर्फ वाला । जिसमें बफ या पाला हो ।