पृष्ठ:बिहारी-सतसई.djvu/१४६

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बिहारी सतसई १२६ १८ 11 115 भरी! आधी राह पर चन्द्रमा को देखकर तुम बहुत सकपकाहट में क्यों पड़ गई हो-ज्योंही आधी राह खतम हुई कि चन्द्रोदय देखकर असमंजस में पड़ गई (कि मैं जाऊँ या नहीं, और यदि जाऊँ, तो कैसे जाऊँ, कहीं कोई देख न ले) किन्तु (शरीर की सुगंध के लोभ से) साथ लगे हुए भौंरों के कारण माग्य से ही गली में अँधियारी छा गई । (जिससे तुम्हें कोई नहीं देख सकेगा।) in जुबति जोन्ह मैं मिलि गई नैकुन होति लखाइ। प्राचा सौंधे के डोरें लगी अली चली सँग जाइ ॥३१५॥ अन्वय-जुबति जोन्ह मैं मिलि गई, नैंकु न लखाइ होति । सौंधे के डोरें लगी अली सँग चली जाइ । जुबतिः = जवान स्त्री । जोन्ह = चाँदनी । नैंकु =तनिक । सौंधे =सुमंध । डोरें लगी =डोर पकड़े, डोरियाई हुई, आश्रय ( सहारे) से । अली=सखी नवयौवना ( नायिका ) चाँदनी में मिल गई-उसका प्रकाशवान् गौर शरीर चन्द्रमा की उज्ज्वल किरणों में साफ मिल गया-जरा भी नहीं दीख पड़ी! ( अतएव, उसकी ) सखी सुगंध की डोर पकड़े-उसके शरीर की सुगंध का सहारा लेकर-(पीछे-पीछे ) साथ में चली गई । T ज्यों ज्यौं आवति निकट निसि त्यौं त्यौं खरी उताल । भमकि झमकि टहलें कर लगी रहँच₹ बाल ।। ३१६ ।। अन्वय-ज्यौं ज्यौं निसि निकट भावति त्यौं त्यौं खरी उताल रहँचटें लगी बाल झमकि झमकि टहलें करे। निसि =रात । खरी-अत्यन्त, अधिक । उताल = उतावली, जल्दीबाजी । रहलै = कामकाज । रहँचटैं-लगी= लगन लगी, प्रेम-पगी। ज्यों-ज्यों रात निकट आती है-ज्यों-ज्यों दिन बीतता जाता और रात पहुँचती जाती है-त्यों-त्यों अत्यन्त उतावली से वह प्रेम में पगी बाला (प्रियतम के मिलन का समय निकट अाता जान ) झमक-झमककर (ताबड़तोड़) की टहलें करती है। घर