पृष्ठ:बुद्धदेव.djvu/४८

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( ३५ ) आदि राज्यों में हूँ दिए। पुरोहित राजाज्ञा पाकर अपने घर गए और योग्य बधू की टोह में लगे। बहुत छानबीन करने पर उनको देवदह के महाराज दंडपाणि की कन्या गोपा ॐ सर्वगुणसंपन्न देख पड़ी और उसीके साथ सिद्धार्थ कुमार का परिणय करने की उन्होंने दंडपाणि से वात चीत की। दंडपाणि सिद्धार्थ कुमार की माता के भाई थे और सिद्धार्थ को अच्छी तरह जानते थे। पुरोहित की वात भी भली लगी और उन्होंने अपने पुरोहित अर्जुन नामक . पंडित को कुमार की परीक्षा के लिये भेना । अर्जुन कपिलवस्तु आए और उन्होंने वेद वेदांग दर्शन आदि में सिद्धार्थ कुमार की परीक्षा ली। कुमार के उत्तर प्रत्युत्तर सुन महाविद्वान् अर्जुन पंडित को अत्यंत तोप हुआ और विवाह करना निश्चय हो गया । शुभ मुहूर्त में कुमार का विवाह देवदह की राजकुमारी गोपा के साथ वड़े गाजे बाजे के साथ किया गया। दंडपाणि ने बड़ा आदर सत्कार किया और अनेक घोड़े, हाथी और धनसंपत्ति विवाह की दक्षिण में दी। वर और वधू विवाह हो जाने पर अनेक दास और दासियों के साथ कपिलवस्तु आए और आनंदपूर्वक रहने लगे। -

  • यशोधरा, हग्या, उत्पलवर्ण भी इसके माम ये।