पृष्ठ:भक्तभावन.pdf/९

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आभार

महाकवि ग्वाल 'भक्तभावन' को पाण्डुलिपि महाराज सयाजीराव विश्वविद्यालय, पड़ौदा के प्राध्य विद्यामंदिर (ओरिएण्टल इंस्टीट्यूट) के हस्तलिखित विभाग में सुरक्षित है। इस पाण्डुलिपि को पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित करने की अनुमति प्रदान करने के लिए में प्राच्य विद्यामंदिर के पदाधिकारियों की आभारी हूँ। विशेष रूप से मैं तत्कालीन डायरेक्टर महोदय प्रो॰ एस॰ जी॰ काँटावाला के प्रति अपना आभार व्यक्त करती हूँ। इस पुस्तक को प्रस्तावना स्वरूप यो शब्द लिखने के लिए भूतपूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो॰ एम॰ जी॰ गुप्त के प्रति भी में अपनी हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित करती हूँ

––प्रेमलता बाफन



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