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भारत में अंगरेज़ी राज
एक और अंगरेज़ विद्वान वॉल्टर हैमिल्टन ने सन् १८२८ में सरकारी रिपोर्टों के आधार पर लिखा था—
साहित्यिक अवनति "भारतवासियों के अन्दर साहित्य और विज्ञान की दिन प्रति दिन अवनति होती जा रही है। विद्वानों की संख्या घटती जा रही है और जो लोग अभी तक विद्याध्ययन करते हैं उनमें भी अध्ययन के विषय बेहद कम होते जा रहे हैं। दर्शन विज्ञान का पढ़ना लोगों ने छोड़ ही दिया है, और सिवाय उन विद्याओं के, जिनका सम्बन्ध विशेष धार्मिक कर्मकाण्डों या फलित के साथ है, और किसी भी विद्या का अब लोग अध्ययन नहीं करते। साहित्य की इस अवनति का मुख्य कारण यह मालूम होता है कि इससे पहले देशी राज में राजा लोग, सरदार लोग