मनोविनोद बालाओंको पिया मिलन की चाह है गले लिपट कर सोने का उत्साह है सुखी सुहागिन करें कन्त सँग केलियां जीवन की सुख सुधा पियें अलबेलियां दुखी बाल विधवाओं की जो है गती कौन सके बतला किसकी इतनी मती जिन्हें जगत की सब बातों से आन है दुख, सुख, मरना, जीना एक समान है जिनको जीते जी दी गयी तिलाञ्जली उन्की कुछ हो दशा किसी को क्या पड़ी लगा दिसम्बर मास, बड़ा दिन पास है आपहुंचा त्यौहार निकट " क्रिसमास" है बाज़ारों में मची, बड़ी एक धूम है सभी तरफ़ को छाया हुआ हुजूम है साहब लोगों के घर जाती डालियां फल मेवा से भरीं खचाखच थालियां ईसाई गन फिरें मगन, मन मोद में सुख से समय बिताबें, विविध विनोद में करें घरों में उत्सव की तैयारियां बना बना कर सुन्दर बन्दन वारियां फूल माल के जाल अनूठी चाल के ललित पताका पंक्ति रचें रंग लाल के भांति भांति के नाच रंग बहु ढंग के कर कर करें कलोल उमंग उमंग के ३३ CCO, Gurukul Kangri Collection, Haridwar, Digitized by eGangotri
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