पृष्ठ:मानसरोवर भाग 3.djvu/३१३

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मानसरोवर ४ यूसुम हो । यार, क्यों न हो, तभी तो.यह ठाट है । मुखड़ा फैसा दमकने लगा, मानों तपाया हुआ कुंदन है। अजी, एक वास्ष्ट पर यह जोबन है, कहीं पूरा अँगरेजी सूट पहन को, तो न जाने क्या गजब हो जाय | सारी मिसें लोट-पोट हो जाय। गला छुपाना मुश्किल हो जाय। आखिर सलाह हुई कि उनके लिए एक अंगरेजो सूट बनवाना चाहिए । इस कला के विशेषज्ञ उनके साथ गुट बांधकर सूट बनवाने चले। पणितजी घर के सम्पन्न धे एक अंगरेजी दूकान से बहुमूल्य सूट लिया गया। रात को इसो उत्सव में गाना-बाना भी हुआ। दूसरे दिन, दस बजे, लोगों ने पण्डितजो को सूट पहनाया। आप अपनो उदासीनता दिखाने के लिए बोले- मुझे तो बिलकुल अच्छा नहीं लगता। आप लोगों को न जाने क्यों ये कप अच्छे लगते हैं ? नईम-जरा गाईने में सूरत देखिए, तो मालूम हो। खासे शाहजाद मालूम पड़ते हो। तुम्हारे हुस्न पर मुझे तो रश्क है। खुदा ने तो आपको ऐसी सूरत दी, और उसे आप मोटे कपड़ों में छिपाये थे। चक्रधर को नेकटाई बाँधने का ज्ञान न था। बोले-भई, इसे तो ठीक कर दो। 'गिरिधरसहाय ने नेकटाई इतनी कसकर बांधी कि पण्डितजी को सांस लेना भी मुश्किल हो गया। बोले-यार, बहुत तग है। गिरिधर-इसका फैशन हो यह है; हम क्या करें। ढीली टाई ऐप में दाखिल है। नईम इन्होंने तो फिर भी बहुत ढोली रखी है। मैं तो और भी कसकर बांधता है। चाधर-अजो, यहाँ तो दम घुट रहा है। नईम-और टाई का मंशा हो क्या है ? इसीलिए तो बांधी जाती है कि आदमो बहुत शोर-जोर से साँस न ले सके। चक्रधर के प्राण संकट में थे। आंखें लाल हो रही थो, चेहरा भी सुर्ख हो गया था। मगर टाई को ढोला करने की हिम्मत न पत्ती थी। इस सज-धन से आप कालेज चले, तो मित्रों का एक गोल सम्मान का भाव दिखाता आपके पीछे-पीछे चला, मानों बरातियों का समूह है । एक दूसरे को तरफ ताकता, और रूमाल मुंह में देकर हँसता था । मगर पण्डित त्रो को क्या खबर । वह तो अपनी धुनमें मस्त थे । अका-