पृष्ठ:मेघदूत का हिन्दी-गद्य में भावार्थ-बोधक अनुवाद.djvu/४०

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मेघदूत ।


कस्तूरी की सुगिन्ध से सुरभित हो जाती हैं। हिमालय पर बर्फ़ बहुत गिरती है । इमसे उनके शिखर शुभ्र दिखाई देते हैं। उस पर्वत पर पहुँच कर थकावट मिटाने के लिए जब नु बर्फ से ढकं हए किसी शिखर के ऊपर बेट जायगा तब ऐसा मालूम होगा जैसे शिवजी के शुभ्र बैल के सिर पर, सींगों से गीली भूमि खादने के कारण, कीचड़ लग रही है।

हिमालय पर उपकार करने का मौका भी शायद तुझे मिल जायगा । जब हवा ज़ोर से चलती है तब उस पर्वत के ऊपर देव- दारु के वृक्ष आपस मे रगड़ खाने लगते हैं। इस रगड़ से कभी कभी आग उत्पन्न हो जाती है। उसकी चिनगारियों से जङ्गल ही नही जल जाता चमरी गायां की पूछी के बाल भी जल जाते हैं। यदि तेरे सामने भी कहीं ऐसी आग लगी हो तो अपनी वारि- धाराओं से हिमालय की दाह-व्यथा तुरन्त ही शान्त कर देना । चूकना मत । क्योंकि. आपत्ति में पड़े हुए पुरुषों की पीड़ा हर लेना ही मत्पुरुषों की सम्पत्ति का सच्चा फल है। सम्पत्तिमान होकर भी मनुष्य यदि विपत्ति-प्रस्तों के काम न आया तो उसकी सम्पत्ति ही फिर किस काम की ?

हिमालय पर शरभ नाम के बड़े वली पशु रहते हैं। उन्हें अपने बन का बड़ा घमण्ट है। इस कारण जब तू घोर रव करंगा-जब तू ज़ोर से गरजेगा-तब उनके कोप का ठिकाना न रहेगा। तेरी ध्वनि उन्हें असह्य हो जायगी । वे कहेंगे-हमारे सामने गरजने- वाला, हमसे भी अधिक बलो, यह कहाँ से आया। अतएव, घमण्ड मे आकर वे कूद-फाँद मचाने लगेंगे और तुझे लाघ कर निकल