पृष्ठ:मेघदूत का हिन्दी-गद्य में भावार्थ-बोधक अनुवाद.djvu/५६

विकिस्रोत से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
४२
मेघदूत ।


ठहर जाना । पहुँचते ही गड़गड़ा कर गरजन न लगना सम्भव है. वह मुझ प्रग्गयी को म्वप्न में देख रही हो। इस दशा में यदि तू गरज कर उसे जगा देगा ना उसका वह स्वग्न-सम्भूत मारा सुख मिट्टी में मिल जायगा। देखना, ऐमा न हो । मेरी तो यह प्रार्थना है कि तु प्रातःकाल तक मेरे घर पर ठहरा रहना । बड़े भोर अपने जल-कणों से भीगी हुई. अत्तएव शीतल. पवन चला कर जव तू चमेन्ती की कलियों को विकसित करना तभी लगे हाथ उसे भी जगा कर मचेत कर देना ! उस समय तुझे खिड़की में बिजली चमकाते वैठा देख वह तेरी ओर निश्चल नेत्रों से देवेगी ! तव तू, धीरे धीर गरज कर उम मानिनी से मेरा मन्देश कहना। सन्देश सुनाने के लिए वही मौका सबसे अच्छा होगा । तू इस प्रकार कहना आरम्भ करना-

"हे सौभाग्यवती : मैं तेरे पति का प्यारा मित्र मेघ हूँ। उमका भेजा हुआ सन्देश लेकर मैं तेरे पास उपस्थित हुआ हूँ। मुझमें यह गुण है कि मेरी मन्द मन्द गरज सुन कर विदेशियों के हृदय में अपनी पत्रियों की वेणी खोलने की उत्कण्ठा बड़ो अधि- कता से उत्पन्न हो जाती है-इतनी अधिकता से कि वे लोग मार्ग में यथेष्ट विश्राम किये बिना ही बड़ी शीघ्रता से अपने घर लौटने की चेष्टा करते हैं।

तेरे मुख से ऐसा वचन सुन कर उसका हृदय उत्कण्ठा से परिपूर्ण हो जायगा और वह अपना सिर उठा कर तुझे इस तरह आदरपूर्वक देखेगो जिस तरह कि पवन-पुत्र हनूमान को मैथिली न दहा था फिर वह के खूब ध्यान लगा कर