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रंगभूमि


सकती। इस अभागे क्लार्क को क्या कोई योरपियन लेडी न मिलती थी कि सोफिया पर गिर पड़ा! कुल का नीचा होगा, कोई अँगरेज उससे अपनी लड़की का विवाह करने पर राजी न होता होगा। विनय इसी छिछोरी स्त्री पर जान देता है। ईश्वर ही जानें, अब उस बेचारे की क्या दशा होगी। कुलटा है, और क्या। जाति और कुल का प्रभाव कहाँ जायगा? सुंदरी है, सुशिक्षिता है, चतुर है, विचारशील है, सब कुछ सही; पर है तो ईसाइन। बाप ने लोगों को ठग-ठगाकर कुछ धन और सम्मान प्राप्त कर लिया है। इससे क्या होता है। मैं तो अब भी उससे वही पहले का-सा बर्ताव करूँगी। जब तक वह स्वयं आगे न बढ़ेगी, हाथ न बढ़ाऊँगी । लेकिन मैं चाहे जो कुछ करूँ, उस पर चाहे कितना ही बड़प्पन जताऊँ, उसके मन में यह अभिमान तो अवश्य ही होगा कि मेरी एक कड़ी निगाह इसके पति के सम्मान और अधिकार को खाक में मिला सकती है। संभव है, वह अब और भी विनीत भाव से पेश आये। अपने सामर्थ्य का ज्ञान हमें शीलवान् बना देता है। मेरा उससे मान करना, तनना हँसी मालूम होगी। उसकी नम्रता से तो उसका ओछापन ही अच्छा। ईश्वर करे, वह मुझसे सीधे मुँह बात न करे, तब देखनेवाले उसे मन में धिक्कारेंगे, इसी में अब मेरी लाज रह सकती है; पर वह इतनी अविचारशील कहाँ है!

अंत में इंदु ने निश्चय किया-मैं सोफिया से मिलूँगी ही नहीं। मैं अपने रानी होने का अभिमान तो उससे कर ही नहीं सकती। हाँ, एक जाति -सेवक की पत्नी बनकर; अपने कुल-गौरव का गर्व दिखाकर उसकी उपेक्षा कर सकती हूँ।

ये सब बातें एक क्षण में इंदु के मन में आ गई। बोली-"मैं आपको कभी दबने की सलाह न दूँगी।"

राजा साहब—"और यदि दबना पड़े?"

इंदु—"तो अपने को अभागिनी समझूगी।”

राजा साहब—"यहाँ तक तो कोई हानि नहीं; पर कोई आन्दोलन तो न उठाओगी? यह इसलिए पूछता हूँ कि तुमने अभी मुझे यह धमकी दी है।"

इदु—"मैं चुपचाप न बैठूँगी। आप दबें, मैं क्यों दबूँ?"

राजा साहब—"चाहे मेरी कितनी ही बदनामी हो जाय?"

इंदु—"मैं इसे बदनामी नहीं समझती।”

राजा साहब—"फिर सोच लो। यह मानी हुई बात है कि वह जमीन मि० सेवक को अवश्य मिलेगी, मैं रोकना भी चाहूँ, तो नहीं रोक सकता, और यह भी मानी हुई बात है कि इस विषय में तुम्हें मौनव्रत का पालन करना पड़ेगा।”

राजा साहब अपने सार्वजनिक जीवन में अपनी सहिष्णुता और मृदु व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थे; पर निजी व्यवहारों में वह इतने क्षमाक्षील न थे। इंदु का चेहरा तम-तमा उठा, तेज होकर बोली-"अगर आपको अपना सम्मान प्यारा है, तो मुझे भी अपना धर्म प्यारा है।"