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पृष्ठ:रणधीर और प्रेममोहिनी.pdf/११९

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गर्भा ] द्वितीय अंक । ५१ चौबेजी - ( सरोजनी से ) तुम्हारो शरीर सिथलसो दिखाई देहै, सो का तुमारो पाऊँ भारी है ? सरोजनी -- ( हंसकर ) हां बेटा, होगा । नाथूराम -- ( सरोजनी से ) थारी जोड़ी कठै छै ? (१) सरोजनी -- ( रणधीर की तरफ देख कर ) ये रही, पर आपकी किसके पास है । ( सब हंसने लगे । ) रणधीर सांझ हो गई, जिसको ज्ञान ध्यान करना हो, कर आओ। हम इतने रिपुदमन सिंहके साथ बाग की सैर करते हैं । फिर चहांसे भोजन करके मकानको चलेंगे। ( सब उठ खड़े हुए) इति द्वितीय गर्भाङ्क । (१) ( सरोजनीसे) तुम्हारी जोडी कहां है ।