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५८ रणधीर और प्रेममोहिनी । [ धीर ( मन ) इन बातों और होगा। (और नाथूरानका प्रवेश ) धीर-(देकर ) तुमसे थे ! सुनामी जीने की गोलीबार चुके हैं और अबेहोसी नहीं है। खीर ( मन ) इन लोगोंने तुमको भुला देने वा ! यां बनाई हो तो क्या रिपुदमन--( मन ) नरोले लोग इतना पाते हैं, अचेत हो जाते हैं, न जाने का पीछा क्यों नहीं होते ! हूँ नावरान --- ( रोती सूरत बनाकर ) बापजी तो नारियो गो हतारी नोत नारियों गयो । कारी नगरी उपराणी दूर जावी, नोकर जाना बीमारी पेटी वा गादारों ने देव, नाव ताल मन्दी आउतियां काम कुरा भुगतान ! अजी और पिन द्वारा पती परणामी, हुई, करदियो हो तो कान आनो, पिr ( रणधीरकी तरफ देखकर ) अन ती म्हारी शबरी न आपने १) के ·