गर्भाङ्क ] प्रथम अंक | २५ ॥ ध्रुपद ॥ पंडितन कार्जे सीखे भागवत ज्ञान गीता, श्रोताहेत साध्यो सार वेदनको वांचवी । कविनके काजै सीखे पिंगल पुरान छन्द, दोहा गाह चौपई कवित्तनको सांचो | कलान्त का भजन बारहमासी सीखलीने, आप मुख गावैं राग रागिनी न राचयो । देवे काजै राजा इतनें कसव सिखे, कसर रही हैं एक ताता थेई नाचवो ॥ १ ॥ जीवन - ( आकर ) महाराज ! पण्डित सोमदत्तजी आ गए क्या आज्ञा है ? रणधीर --अच्छा उनको सत्कारसे लेआ । ( उसके गए पीछे ) देखो आज हंसी हंसी की बातों में इतना समय वृथा चला गया, इतनी देर विद्या पढ़नेमें मन लगाते तो कितना लाभ होता । कालिदास और भवभूत्यादि कवियोंकी आयु साधारण लोगों से अधिक न थी, परन्तु वे समयकी महिमा जानते थे, इस कारण उनका नाम आजतक अमर है और असंख्य मनुष्य प्रति दिन जन्म लेकर करते हैं जिनका नाम कोई नहीं जानता। हां, आठ पहरंकी महनत करनेसे बुद्धि शिथिल हो जाती है, इस कारण आठ पहर घड़ी दो घड़ी मन बहलानेके वारते ऐसी भी चाहिये ; परन्तु सब लोगोंके आगे ऐसी बातें करनेसे तेज जाता रहता है । पण्डित सोमदत्तको आते देख, सबने उठकर प्रणाम किया और रणधीरसिंहने सत्कार करके उनको वीचको कुर्सी पर बिठाया ।
पृष्ठ:रणधीर और प्रेममोहिनी.pdf/३३
दिखावट