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पृष्ठ:रणधीर और प्रेममोहिनी.pdf/३८

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३० रणवीर और प्रेममोहिनी [ पञ्चम इस मामले में कुछ तहरीक न करनी चाहिये क्योंकि हमारे कहने से इनके दिलपर पूरा असर न हुआ, तो आय: बड़ी खराबी की सूरत पैदा होगी। दिलपर असर होनेका ये कायदा है कि आदमीका दिल वे होशी की हालत सिवाय हर वक्त किसी वातके ख्याल में मशगूल रहता है और उसका खास ये काम है कि वो अपने मुतलिकी तमाम वातक बारते कुछ न कुछ राज कायन करे। जब ये राय कायम हो जाती है तो आदमी उसके बमूजिव अमलदरामद करता है चूंकि कन्फहन आदमीकी राय मुस्तहकिन नहीं होती । सबसे उनकी काररवाई में अक्सर सलल वाके होते रहते हैं। नगर हमको चलें इस वातसे कुछ चरन नहीं है। जिस वक्त आदमीका दिल किसी बात के सवाल महव हो, और वो उसकी नियत अपनी अकलसे कुछ राच भो कायन कर चुका हो, उस वक्त उसका कोई मोतविर आदमी उसके खयाल बमूजिव अपनी खास गजे विना उसकी रायसे मिलती हुई बात कहे तो उस बातका गुननेवालक दिलमें पूरा असर होता है । सगर इन बातों में जिस कदर तफर्क पड़ता जायगा सुनने- बालके दिलका असर बदलता चला जायगा । इस वास्ते हर शख्सको बात कहने पहले इन तमान वातोंपर गौर करना चाहिये चुनाचे में खुद गौर करता हूं तो मुझे रणवीर- सिंहकी तबियत शराय और रण्डीसे निहायत मुतनफ्फिर मालून देती है । पस, भै क्योंकर आना दिल्ली मन्शा उनके रूबरू जाहर करूं । ( बहुत विचारकर ) अच्छा कल यागमें इस पेचीदा मामले को दुल्ली करने वास्ते में अपनी माशूके दिलरूवाको बुलाता हूं। मुझको यकीन है कि रणधीरसिंह उसको देखते हो एकवार हिरनकी तरह चोकन्ने होकर चौकड़ी भरेंगे। मुमकिन नहीं कि आखीरमें इसका जादू उनपर असर न करे । हर कामके आगाज में चंद दरचंद नुक्सानुमाया होते हैं मगर कोशिश च तन्दिही करनेसे वह सब आसानी रफा हो सकती है :- 'बहर कारे कि हिफत एस्तः गर्दछ । अगर खारे बुवद गुल्दस्तः गर्दद ॥