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पृष्ठ:रणधीर और प्रेममोहिनी.pdf/४२

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v ક रणधीर और प्रेममोहिनी | [ पञ्चम जीवन - अच्छा, आप इस अंधेरीमें इतनी रात कहां चले गए ! आपका घर तो यहां नहीं है । मुखवासीलाल- आज इस महलेमें एक जगह मशायरा होगा इस वारते दोघी वहां जानेका इरादा है | जीवन - साहब, मशायर में क्या होता है ?- मुखवासीलाल- शायर कविलोग खड़े हो, अपने शेर औरोंको सुनाते हैं । जीवन --तो मैं भी आपके साथ चलूँगा । सुखवासीलाल -- हमारे नजदीक तो वहां तुम्हारी दिलगीकी कोई बात नहीं है। जीवन-कुछ गांवका तो नहीं जाता ? सुखवासीलाल - (मनमें) अब इससे क्योंकर पीछा छुड़ाऊं । (प्रकट) लेकिन भाई मैं तो अभी कई चार दोस्तोंस मिलता मिलता कोई रातके बारह एक बजे वहां पहुंचूंगा । जीवन -- ( मनमें) बनावटकी वातमें कभी झोल पड़े बिना नहीं रहता । (अक्ट) अच्छा आप यार दोस्तोंसे मिलने जायेंगे, तबतक में उनके दरवाजे पर बैठा रहूंगा । सुखवासीलाल- (मनमें) अव जिद करनेसे राज अफ्ता होता है मगर क्या करें ? (१) (प्रकट ) अब तो रात ज्यादा गई किसी रोज श्यामसे ले चलकर तुमको बहांकी सब सैर दिखायेंगे । जीवन --- (मनमें) ये इनकी आलाढाली है पर अपनी बातका प्रमाण देनेके लिये मैं इनसे पहले कोई चीज ले लू फिर इनके पीछे जाकर इनका सब हाल अपनी आंख से देख अऊंगा । (प्रकट) बहुत अच्छा, आप सच कहते हैं, हम लोग मगायरे में क्या समझे । (१) (मनमें) अव इट करनेसे गुप्त भेद प्रकट होता है परन्तु क्या करें ।