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पृष्ठ:रणधीर और प्रेममोहिनी.pdf/५६

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१२२ रणधीर और प्रेममोहिनी । [ चतुर्थ सुखवासीलाल - जिस रियासत में नक्काल मुसाहिब हों, खिदमतगार मशीर हों, उस रियासत में वज्रज बर्बादी और क्या अखीर होगा ? ( १ ) नाथूराम -- आदमी परखवा मैं तो रणधीरसिंहजी री भारी सोमासुणी छे । (२) सुखवासीलाल - ~ खाक, जो इनको आदमीकी ही शनाख्त होती तो नुक्स क्या था ? हर शख्शका दिल किसी न किसी कारकी तरफ स्नू होता है । अगर उसकी तबियत के मुआफिक उससे काम लिया जाय तो निहायत उमदा कारवाई जहूरमें आवे । इन्तजामें मुल्कीका ये एक जुज है, मगर हर किसीको आदमीकी शनाख्त नहीं होती ! रणधीरसिंह आदमीको कदर क्या जाने ? कोहिस्तानकी सरसन्जी दूरसे क्सां नजर आती है लेकिन कोई उसके करीब जाकर देखे तो उसका नशेवो फराज मालूम हो। आपकी क्या ? घड़ी दो घड़ीके वास्ते आए अपना काम करके चले गये । देखो, इनके दिमागमें जवानीकी वू समा रही है । इनका मिजाज निहायत की है, ये सबको वेवफा समझते हैं; इनकी कल तो चुगलखोरोंके हात 1 (3) है ? ( १ ) जिस रियासत में मांडू मुसाहब हों, खिमदगार सलाह देनेवाले हों उस रियासत में सिवाय सत्यानाशके क्या परिणाम होगा ?. (२) आदमी परखने में तो रणधीरसिंहकी बढ़ी बड़ाई सुनी है । ( ३ ) धूल, जो इनको मनुष्यकी ही पहचान होती तो कसर क्या थी ? हर मनुष्यके मनका लगाव किसी न किसी कामकी तरफ होता है जो उसके मनगूजब काम उससे लिया जाय तो काम बहुत अच्छा चले, देशके प्रबन्धका ये भाग है, परन्तु सत्रको मनुष्यकी पहचान नहीं होती। रणधीर सिंह मनुष्यकी परख क्या जाने ? पर्वतकी हरियाली दूरसे एकसी दिखाई देती है पर कोई उसके पास जाकर देखे तो उसका ऊंच नीच मालूम हो। आपको क्या ? घड़ी दो घडीके वास्ते आप अपना काम करके चले गए। देखो, इनके सिरमें जवानीको वास वल रही है। इनका सुभाव चहा वहमी है, ये सबको निर्मोही समझते हैं, इनको कल तो चुगलखोरों के हाथ है ।