गर्भाङ्क ] चतुर्थ अंक | १२३ नाथूरात-- आपने इशी कांई बात देखी ? ( १ ) सुखवासीलाल देखी क्या आजमाई। परसों शवको फितनेपदजिके फरेवमे आकर हजरतने मुझसे कर लाए थे ! मगर मैं भला कब दावमें आनेवाला हू, मैंने ऐसा जवाब दिया कि हजरत अपनासा मुंह लेकर खामोश रह गए। ( ३ ) नाथूराम -- आपरी बात तो आपरे साथ रही, पण मैं रणधीरसिंह जीरी इसी नहीं जाणी छो ! ( ) सुखवासौलाल—अपने अपने दिलमें सब दानिशमन्द होते हैं मगर गैर तारीफ करें जब अकलमन्दी समझी जाय । देखो इदमनकी लाइन्तहा फौज के मुकाबिल एक इन्सान जईफुल चुनियांनका ताकत आजमाई करना किस जी शहरको पसन्द आयगा ! ( ४ ) चौबेजीका प्रवेश | चौबेजी- आज सवेरे काऊ भले भागवानको मोड़ो देखके उदेहे जो भोरही लछमी भेट भई । ( जेबसे नौरत्नकी जोड़ी निकालकर ) भय्याजी ( रणधीर (१) आपने ऐसी क्या बात देखी ? ( २ ) देखी क्या अजमाई। परसों रातको किसी बखेड़िएके दावमें आकर महात्माने मुझसे चक्कर लाए थे ! परन्तु मैं भला कब दावमें आनेवाला हूं। मैंने ऐसा जवाब दिया कि वो आप अपना सा मुंह लेकर चुप रह गए.. 4 . (३.) आपकी बात तो आपके साथ रही पल्तु मैंने रणधीर सिंहकी ऐसी नहीं जानी थी। ( ४ ) अपने अपने मनमें सब चतुर होते हैं परन्तु दूसरे बडाई करें जब चतुराई समझी जाय 1 देखो, बैरीकी भगणित सेनाके आगे. एक तुच्छ मनुष्यका बल करना किस बुद्धिमानको अच्छा लगेगा ! .
पृष्ठ:रणधीर और प्रेममोहिनी.pdf/५७
दिखावट