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पृष्ठ:रणधीर और प्रेममोहिनी.pdf/७

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नाटककारकी जीवनी: oa राक्षस. था 'लाला श्री निवानदास जातिके वैदय थे । उनके पिताका नाम लाला मूंगेलालजी t वे मथुरा के सुप्रसिद्ध सेट लक्ष्मीचंदजीके प्रधान मुनीच थे | कहने की तो वे मुनीष थे पर वास्तवमें वे सेठजी के दीवान थे। वे दिल्लीकी कोठीके कारिंदे थे और वहीं रहते थे । लाला श्रीनिवासदासका जन्म संवत् १९०८ सन् १८५१ ई० में हुआ था । ये बाल्यावस्था हीसे बड़े शीलवान, सदाचारी और चतुर थे। इन्होंने आरम्भमें हिन्दी और फिर उर्दू, फारसी, संस्कृत और अंगरेजी आदि भाषाओं में अभ्यास करके शीघ्र ही अच्छी योग्यता प्राप्त कर ली 1 लाला श्रीनिवासदासने छोटी उम्र में बड़ी योग्यता प्राप्त कर लो थी। महाजनी कारोवार में तो इन्होंने ऐसी दक्षता प्राप्त कर ली थी कि केवल अठारह वर्षकी अस्थामें दिल्ली की कोठीका सारा कारोवार हाथोंहाथ संभाल लिया। इनकी ऐसी योग्यता देखकर पंजाव प्रान्तकी गवर्नमेंटने इन्हें म्युनिसिपल कमिशनर बनाया और आनरेरी मजिस्ट्रेटकी पदवी प्रदान की । इनकी जैसी रोझ बूझ सरकार में थी वैसी ही विरादरीवाले और शहरके महाजन लोग भी इनको मानते थे 1 लाल श्रीनिवासदासको दिल्लीको कोठीका कारवार करनेके अतिरिक्त इधर उधर दौरा करके और और कोठियोंकी भी देखभाल करनी पड़ती थी, इससे इन्हें अपनी बुद्धिको परिमार्जित करनेका और भी अच्छा अवसर हाथ लगा। इन्हें मातृभाषा