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पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/११९

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( ६६ ) (४) प्रेम दुःखिता ( प्रेम हो जाने पर बिछुरने से दुखी हो वह प्रेमदुःखिता है | ) नायिका के अन्य भेद :- (क) श्रन्यसुरति दुःखिता । (ख) गर्विता । (ग) मानिनी | । सभी नायिकाओं मे भेद होते हैं । प्राचीन श्राचार्यों के मत में यह भेद नहीं मिलता, इसे नवीन लोगों ने काट कर गर्विता स्वाधीन- निकले हैं और इन बनाया है । श्रन्य-सुरति दुःखिग खंडिता से, पतिका से और मान से मानिनी ये तीन भेद भेदों को श्रष्ट नायिका भेद से अलग ठहरा दिया गया है । यद्यपि ये अष्ट नायिका भेद मे नहीं वर्गीकृत होते तो भी अवस्था भेद से सब भिन्न हो जाते हैं । यद्यपि नवीन मत पर तीनों भेद विदित हुए तो भी ग्यारह सौ बावन प्रकार की नायिकाओं मे ये नहीं गिने जाते । ' गर्विता के भेद हैं : - (१) वक्रोक्ति गर्विता (२) सुधि प्रेम गर्विता (३) रूप गर्विता और स्वच्छ रूपगर्विता । (४) गुण गर्विता और स्वच्छ गुण गर्विता । मानिनी - प्रिय द्वारा किए गए अपराध को लेख कर जब नायिका उससे उदास होती है तब वह मानिनी नायिका हो जाती हैं। तीन प्रकार से कोप प्रकट करती है । पिय समुख कोप करनेवाली खडिता, मुँह पीछे अन्य संयोग कुपित एवं कोप मौन । अवस्था भेद से नायिका के आठ भेद :- (१) स्वाधीन पतिका - निय जिसके गुण या स्नेह के अधीन हो । (२) वासकसज्जा - प्रिय के आने के दिन शृंगार से शरीर को सानेवाली नायिका । (३) उत्कठिता- किसी कारण से प्रिय के गृह न् श्राने से चितित नायिका | (४) अभिसारिका - जो प्रिय से मिलने के लिये उसके पास जाय या प्रिय को स्वयं अपने पास बुला ले ।