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पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/१६

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गर्हिताओयक मलनबुवुन लहिमनरू परिभ्रगति यहकीन प्रायज कोमारिकेत्मा जोकमा मोहि सिरदीन ४० सरूपगर्विता जोर कमल न दुषतनहिमेर रूप सजानना भो माननजिन कही सरसिज सत्रसमान ४८ हौंनस होंगीवान मलिनोसों कहन निर्मक मेरेभषकों चंद कहि लावन लाल कलंक ४९ वक्रोक निगुनगना मोपे शुनक छ वैन ही ये सोने हितवार अप निरीहूं पिपहिमांवर जातिपठा३ ५० सघनगर्विता गनोपठीन जो छीन केसो चिन सोरसलीन जीनंनार के जोबीन केक ऐबांधि आधीन ५१ को चतुराई जोन हो एककला में जीनि आजुन लाम नकोक सहायछ लाकीरीति ५२मानिनील छना पिक अपराध कप नियउ रासजोहो३ नाहिमा निनी करु जसबजे पंडितक विलाइ ५३ नीनिभतिषियते। सोकरतिभानकोपपरकास उषपरिके