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पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/२५५

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'रसलीन' ११० बार बार हेरत नैकु लखो निज कहा दरपन मैं' मैं चित चित लाइ । बदन मैं राधे गुनमानी उदाहरण बदन मिलाइ ||५६६ || अहो निठुर निfe कित बसै इती बात सुनि कान । कछु मिसि" करि श्रापू हरी' करयौ बाम सौ मान || ५६७ || चतुर नायक - लक्षण निपुन होइ जो सकल विधि सोई चतुर बखान । पुनि क्रिया चतुर पहचान || ५६८ || 1 बचन चतुर- उदाहरण कह्यौ हरि राधिकहि' सुनाइ । बचन चतुर है एक मिलि करि सब त्रों यौं लैहौं पाहन संग ही तौ तुव कैसी विधि चमकत हुती' नायक स्वयदूत 1 गाइ मिलाइ ||५६६ || बाम ||३७० ॥ अंबर मैं अभिराम । लखी स्याम कोउ कामिनी नहीं दामिनी छांह । माँह ॥ ५७१ ।। चली कहाँ 'कीजै कृपा सघन कुंज की भुव अकास दोऊ जरत जेठ दुपहरी यह अँधियारी मैं पिया मिलि चलिये किनि हम सहाइ तुम होइ तुम मुख दुति हमहि सहार || ५७२ || - ५६६ – १. यो ( १ ) । श्राह । ५६७–१···१. कछु यक मिसि ( २, ३ ), २. ग्राप ( २, ३ ), ३. हरि " ( २, ३ ) । ५६८ - १. ग्ररु ( २, ३ ), २. पुनि जान ( २, ३ ) | ५६६-१. राधि के ( २, ३ ), २. सिलाइ ( २, ३ ) । ५७० - १. हती ( १ ) । ५६८ - निपुन = कुशल, चतुर । ५६ ६--- पाहन = पत्थर । ५७० - अंबर = आकाश । ५७१ भुव=भू, आकाश ।