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पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/२६१

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रसप्रबोध बाम चोरुटी' की कथा कहिये काहि सुनाइ । ११६ जागेइ नहि मिलत है सपनेहु गई चुराह ॥५६६ ॥ चित्र दर्शन - उदाहरण चित्रहि चितवत चित्र लौं' रही एकटक जोइ । 3 मित्र बिलोकतिर रावरी कहौउ कौन गति होइ ॥ ६००|| निरखि निरखि जिहि चित्र हरि राखत हौं हिय लाइ । .२ तेहि' देखाइ' कै निज गरे डारे पाय बनाइ ॥ ६०१ ॥ सौतुष दर्शन - उदाहरण खिनि' पिय मन खिन' पिया मन निरख जात यौं भोइ । ज्यौ खिनि' नदि 'जल' समुद जल नदी समुद्र जल होइ ॥ ६०२॥ 3 3 ज्यौं पिय हग अलि भवति तिय बदन कमल की ओर । स्यौं पिय मुख सखि लखि भये तिय के नैन चकोर ||६०३ ॥ ५ε६—१. चोरटी ( २, ३ ), २. सुपने ( २, ३ ), ३. गयौ ( १ ), ४, चोराइ ( २, ३ ) । ६०० – १. त्यौ ( २, ३ ), २. विलोकत ( १ ), ३. कहो ( २, ३ ) । ६०१ - १. तिहि ( २, ३) २. दिखाय ( २, ३ ), ३. रहो ( ३ ) । ६०२ - १. खिन ( १ ), २. ननदि ( २, ३ ), ३. ३. जल समुद नदी समुद जल ( २, ३ ) । ५३३ - चोरुटी = चुरानेवाली । ३०२ - भोइ = मोह | ३०३ - भवति = घूमता है ।