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पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/२८४

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१३६ "रसलोन" विहित हाव- उदाहरण लखि न सकति तिय नैन भरि घरी' सखिन की श्रानि । पीपर भाँवर तन भरै पी पर भावरि प्राति ॥७२६ ॥ बात कहत हरि सो भई यह तिय की गति ज्यों ज्यों खोल्यौ मदन मुख त्यौ त्यों मूँधो मोटायितहाव- उदाहरण श्राज | लाज || ७३० ॥ स्याम बिलोकत काम तें भो' यह बाम सुभाइ । करन खुजाइ उठाइ कर कर अँगरानी' जमुहाई । ७३१ ॥ बिहित - हाव तथा मोटायित हाव भाव - दूसरे मल से प्रगट भए चित चाव तिय पिय सो करै ताहि बिहित कोऊ' कहै कोउ मोट्टायित उदाहरण दुराव | हाव ॥७३२ ॥ स्याम बिलोकत कामते भयो कम्प जो बाम खीत नाम लै लाज तें' बैठि गई तेहि ठाम ॥७३३॥ ७२६ – १. धरे ( १ ), २. प्रान (२,३ ) । ७३०– १. गत ( १ ), २. मूँदै ( १ ) । ७३१ – १. भ्यों ( २, ३ ), २. अॅगिरानी (२, ३ ) । ७३२-१. कोड ( २, ३ ), २. कोऊ ( २, ३)। ७३३ – १. सो ( १ ), २. तित ( २, ३ ), ३. बाम ( २, ३ ७२६ - पीपर = पीपल वृक्ष, एक लता जिसकी कलियाँ प्रसिद्ध श्रौषधि हैं । पी पर = दूसरे का पति । ७३०—मू द्यौ = बन्द किया । ७३९—करन=कान। खुजाइ = खुजलाकर । अँगरानी = अँगड़ाती हुई, देह वोडती हुई । ७३२ - दुराव = भेदभाव, कपट । ७३३ - सीत = सर्दी, ।