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पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/३४०

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१६५ 'रसलीन' कहूँ. प्रस्न उत्तर कहूँ" प्रस्नोत्तर कहुँ होइ । सौ तिनि सँभवै होत कहुँ र बक एतै विधि जोइ || १०५२|| 3 १०५२–११. कहुँ प्रश्नोत्तर होत कहुँ ( २, ३ ), २. तिहि ( २, ३ ) ३. बाकपती ( २, ३ ), ४. निधि ( २, ३ ) । १०१२ - बकबकने की क्रिया; बकवास, ।