रसप्रबोध २०२ दानवीर का उदाहरण तिन हैदर के दान को को करि सके सुमार । बिके बहन्तरि' बार ॥ २०८६ ॥ जो परहित चित चाव सो बिके भयानक रस लक्षण परिपोषक भय भाव को लोह भयानक जानि । बसत' घोर धुनि घोर े लहि सदा होत है श्रानि ॥ १०६० ॥ मुख सूखन' हिय धकधकी कम्पादिक' श्रनुभाव । स्याम बरन अरु देवता काल कहत कबिराव ॥ १०६१ ॥ भयानक रस के स्थायी भाव भय का उदाहरण रावन के हैं दस दल बदन और बीस हैं बाँह । यह सुनि के हिय भै कछू भयो राम दल माँह || १०६२ ॥ भयानक रस का उदाहरण भभरि राम दल के भये बदन पीत ज्यौं धूप । । जब रावन को श्रचिका' लख्यो डरावन रूप ॥ १०६३॥ १०८६ - १. बहत्तर ( २, ३ ) । १०६० – १. बस्तु ( १ ), २. घेर ( १ ) । १०६१ - १. सूखैन ( १ ), २. कॉपादिक ( १ ) 1 १०६३ - १. श्रचका ( १ ) । १०८६ – सुमार = गिनती । १०३० - घोर = भयानक | १०३३ –— श्रचिका - = अचानक, यकायक, श्राश्चर्यजनक |
पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/३४७
दिखावट