१६८ ११५ १८७ ( २३५ ) दो० पृष्ट ६१ १६ तुव विछुरत तन नगर मे ४५६ तुव बिछुरत ही कान्ह की १०१४१८८ तुव हित नव तरु नेह को ६७ तू अरि सोकन तिय लई २०६८ १६८ तू चह मन तजि जमपुरी ८६५ तू तिय छवि मद जो दई ५६७ तू बिछुरत ही बिरह ये १००८ तेइस मे बसि बल्लभा ५११ १०० दो० पृष्ठ ६६० १३२ दिन निसि रवि ससि लहत दिन प्रमान के दरवि दै ३१७ दिन सोहित जल मल मै ૬૪ ६८६ १३२ दिन है मै मिलि हैं इन्हें ४४१ ८७ दिपति देह छवि गेह की ६४८ १२४ दीप तिहारे नेह को वरत ७८६ १४६ तेरह से बावन बहुरि ४६४ ६७ दीपक लौ कॉपति दुती २४७ ५१ तेरि र चितवत हि जब २७६ ५६ दुख दारिद बिरहादिते ८३७ १५८ तेरे पास प्रकास बर ३३६ ६८ दुतिय साध्य दुसान्य है २२३ ४६ तेहि पीछे इक्कीस लौ ४६६ ६८ दुरी गॉठि जो बाल हिय २०३ ४३ तेहि सिंगार को देवता ६१ १५ दुहॅू दिसि कच कुच भार ते ३६२७८ तौ प्रवीन जो छीन कै ३४६ ७१ दूजौ यह अनुभाव रु ८०३ १५२ तौ बसन्त कोऊ नही ७६१ १४५ दूजो बैसिक मत्च है ५५० १०७ थ दूतिहिं जो छलि पुते २७४ ५५ थल बताइ त्रायो न पिय ३८७ ७७ दूती सो सब तूति करि २७३ ५५ थाई कारन को सुकवि ४६ १३ थाई के यौ प्रकट भय ५४ देवन पूजन जाहि रु २४० १४ देस काल बुद्धि बचन पुनि ५० थाई है मन भाव सो ३८ ११ ६७७ १८८ थकित भई हौ हाल ही २३६ थूल अंग लोयन छयो ४७७ द ५५ देस देस के पुरुष सत्र ८४० १५६ ६५ देह छीन मोटी नसै ४७५ ६४ दोऊ सरबर न्हात रु ६४६ १७७ १४६ १०६ १७० दई जो तुम बनमाल सो ७६२ दई लाज बिसराइ जिन ५६० द िहानि बिरहादि यै ६०= दमन खुलत नहिं मंद मै १०६० १६७ दान दया संत भल सुभ ५८६ ११३ दिन अह्राइ साजै बसन ३८०, ७६ दिन वसेरत ही गयौ ८५६ दिन दिन बढि बढि श्राइ कत हगन जोरि मुसकाइ अरु ७०७ १३५ हगन पीक अंजन धर १७६ ३८ १६२ गन मीजि अलसाय १६६ गन मॅदि मोहन जुरै ८६५ १६२ १००३ १८६ द्वापर में जब होइगो ६८२ १८३ दोहा मै यहि ग्रंथ को २३ ८ चल हेरै हँसे ७५६ १४४ गन जोरि ठिलाई रु ७२० १३७
पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/३७९
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