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पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/३८७

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२७ २६ ( २४३ ) दो० पृष्ठ दो० पृष्ठ १५२ रमनी रमन मिलाइ यो ६६१ १२७ रम्ये सबनि मै श्ररु रह्यौ ३ २५ ३ ३४ रवन गवन सुनि कै सवन ४२८८५ २५ रस को रूप बखानि कै ६० १५ रसप्रधान ते नाम यै ५८१ ११२ ये प्रगटत थिर भाव को ८०१ यो भाजति नवला गही ११२ यो डर लागत सेत से १५७ यो रति राचति नवबधू ११३ यौ यो प्रभु जगत मे ११४५ २१० यौ ऐचति पग पग धरति ३६३७८ यौ तिय नैननि लाज मै १२४ यौनवला रति मे करति ११४ यौवनतन पिय बात सो ५२६१०३ रस सिंगार सुहस करुन ५७ १४ रसिक पाइ मन मोद सो ३१४ रहत टूटि कै बाल सो ५२६ रहत सदा थिर भाव मै ६३ १०३ ८२५ २५७ यौ बाला जोबन झलक ८६ २० रहै सदा जो संग रु ६०५ ११६ मीजत कोऊ लला ११५ २६ राग द्वेष श्रादिकन के ८८७ १६७ यौ रति मै सुकुमारि कै १३७ ३० राते डोरन ते लसत ६४३ १७६ यौ मॅकेत सुख लखत हरि २६८ यौ सुभटन सँग लरत है १०८५ २०१ यौ ही लाज न खोइये ३७२ ६० राधा तन फूलन मिल्यौ २६६ ६० रावन के हैं दस बदन १०१२ २०६ ७५ र रकत बूँद काजर भर्च ४२४ ८४ रिपु बीभत्स सिंगार को ११३८ २०७ रीत सॅजोगी बरन की १६४ ४१ रीति सो व्यग्याविग्य श्री १६८ ४२ री दामिनी घनस्याम मिलि १०३३ रच्यौ काम यह मुकर कै ८७१ रच्यौ गवन जो करि कृपा ४३३ रति श्रारभ निहारि जब १३४ १६४ १६२ ८६ रूखै होतेहु बासु लै २१६ ४५ २६ रूप गरब जोबन नगर ७४७ १४२ रति श्रालम्बन होत है ५६ ११५ रूप गुनन मै श्रागरी ५५३ १०७ रति कारन जो कवित मै ७० १७ रूप न श्राय है कछू ३६६ ७४ रति गतादि ते निबलता ८३४ १५७ रूप राजि सी फबन को ७६५ १४५ रति गति के कछु बल ८८ १६७ रे तन जड तेरो कही ४३७ ८७ रति सरूप धरि तरे १४८ ३३ रे मनाली सँग भ्रमत ११११२०५ रति हॉसी अरु सोक पुनि ४८ रत्यादिक थिर भाव को ५२ रमनी व खियनि चितै २२.१३२ १२ रे मन तेरो जगत मै १९४१ २०६ १३ रे मन हाथ न लगत कछु १११० २०५ रमति रमनि विपरीत यौ १३६ ३० रे यह ढोटा कौन को २५६ ५३ रमनी मन पावत नही १२० २७ रे रॅगिया करि राखिहौ २६७ ५४ रमनी रमन मिलाइ जब ६७१ १२६ रोरा ठानि कै ढीठ तिय २७२ ५५