श्रंगदर्पण २८४ पद अंगुरी-वर्णन रद कीनों' तुव जुगल पद सब मद जीवन मूरि । दसम दसा दस दिसन की करि दस अंगुरिन' दुरि || १६५ | पदनख वर्णन दुति वा उदित नखन की भनै' कवन कवि ईस । पाय परत छिति जाहि के भयो चंद पोयसीस || १६६ || जावक वर्णन मन भावक जावक सखिन सौतिन पावक ज्वाल | सीस नवावक लाल' को तुव पद... जावक बाल • ३ ॥१६७॥ चूरा-वर्णन गुँजरी चूरा कनक तुव ऐसी बनी "सुहाय...१ । मनु ससि रवि निज रंग कर ल्याए पूजन पाय ॥। १६८ ।। - १६५ – १ – कीन्हे ( ३ ) २ - दससी दिन (३), ३ - अंगुरि (३) । १६६-१-भजै ( ३ ), २.२ – पाइ परछत जासुको ( ३ ), ३- बकसीस (३) । - - १६७ – १ – पावक ( ३ ), २ – केति ( ३ ), ३० ३ – पग जावक लाल (३) । १६८ - १ १ – बनक सुहाइ ( ३ ), २.२ – रबिकर ल्यायो । पूजन पाइ ( २,३ )। १६५ - रद = दाँत | मूरि= मूल | दलमदसा = दसवी अवस्था, मृत्यु | दस दिसन = दसो दिशाएँ । १६६ -- उदित = उज्वल, प्रकट, स्वच्छ । कवि ईस= कवीश्वर | १६७ —-जावक=घालता, महावर | ज्वाल= ज्वाला, लपट | नवावक = नवाने वाला, झुकाने वाला | जावक जायमान । । १६८ - गुँजरी = सुदरी, गुंजा, घुघची। चूरा=चूडामणि, कडा | कनक = नाग केसर, सोना । पाय=पाँव |
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