खोज विवरण १६२३, १४० ए - ( ४०५ ) नं० १४० (ए) । नखसिख बाई रसलीन (सैयद गुलाम नबी बिलग्रामी) 1 सब्सटेंस कंट्री - मेड पेपर । लीव्स - ६ । साइज -- १२४८ इचेज । लाइंस पर पेल–७० | एक्सटेंट—२६३ अनुष्टुप् श्लोकाज । अपियरेंस — श्रोल्ड | कैरेक्टर - नागरी । डेट श्राफ कंपोजिशन — संवत् १७६४ आर ए० डी० १७३७ । डेट श्राफ मैनुस्क्रिप्ट - सं० १६३५ श्रार ए० डी० १८७८ । प्लेस श्राफ डिपाजिट - ठाकुर त्रिभुवन सिंह, विलेज - सैयदपुर, पोस्ट आफिस - नीलगाँव, डिस्ट्रिक्ट - सीतापुर ( श्रवध ) । बिगिनिंग - श्री गणेशायनमः । श्रथ नखसिख लिप्यते । ॥ दोहा ॥ सो पावे या जगत में सर सनेह के भाय । जो तन मन ते तिलन लौ बालन हाथ बिकाय ॥ बार बरनन || मोर पक्ष यों सिर चढ़े बारन ते अधिकाय | सहस चषन लषि तुव कचन परे मान छिन पाइ ॥ बेनी बरनन || भनत न कैसेऊ बने या बेनी के दाय | तू पीछे गहि जगत के पीछे परी बनाय ॥ जे हरि रहे त्रिलोक मो कालीनाथ कहाइ । ते तुव बेनी के डसे सब जगु हंसतु बनाइ ॥ ॥ मैंमद बरनन ॥ मानिक मनि पै नहीं जडी मैमद भबियन लाइ । मनि तजि फनि पीछे लगी तुव बेनी के श्राइ ॥ मैमद बिन मुकुत लषि यह जिव श्रई जागि ॥ ससि हित पीछे राहु के नषत रहे हैं लागि ॥ ॥ जूरो बरनन || चंदमुषी जूरो चितै चित लीन्हों पहिचान | सीस उठावे हैं तिमिर ससि को पीछो जानि ॥ यो बाँधति जूरा तिया पटिवन को चिकनाह ॥ पाग चिकनियाँ सीस की जाते रही लजाइ ॥
पृष्ठ:रसलीन ग्रंथावली.djvu/५३८
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