( ७६ ) आराध्य प्रणम्य होता है इसलिये देवी श्रादि के पवित्र रूप वर्णन में पैर के नख से कवि रचना श्रारंभ करता है और धीरे-धीरे शिर की ओर जाता है । नायिका, प्रेमिका या प्रणयिनी का वर्णन वह शिर से आरंभ करता है और पैर की ओर धीरे धीरे उतरता है । इस दृष्टि से यह ग्रथ रीति परंपरा का एक अंग है नख शिख (पद्य) केशवदासकृत । परपरा का प्रवाह नवीन स्रोत नख शिख (पद्य) अन्य नाम 'अंगदर्पण' । गुलाम नबी ( रसलीन) कृत नख शिख (पद्य) गोकुलकृत नख शिख (पद्य) छितिपालकृत नख शिख (पद्य) जगत सिंहकृत नख शिख ( पद्य ) देवकृत नख शिख (पद्य) प्रतापसाहिकृत नख शिख (पद्य) प्रोमसखी कृत नख शिख (पद्य) बलभद्र कृत नख शिख (पद्य) भीष्मकृत नख शिख (पद्य) मुरलीधर कृत नख शिख (पद्य) शिवनाथकृत नख शिख (पद्य) श्री गोविंदकृत नख शिख (पद्य) संतबख्श कृत नख शिख (पद्य) सूरतिमिश्र कृत नख शिख (पद्य) सेवादासकृत नख शिख (पद्य) हरिबंश ( घसीटा ) कृत नख शिख (पद्य) ग्वाल कवि कृत नख शिख - शिखनख - हनुमान कृत नख शिख राधा जी को (पद्य) चदनकृत नख शिख रामचंद्र जू को (पद्य) बिहारीकृत नख शिख वर्णन, बलबीर कृत नख शिख सटीक ( गद्य-पद्य ) मणिरामकृत - हस्तलिखित हिंदी पुस्तकों का संक्षिप्त विवरण, प्रथम खंड, पृष्ठ ४७१-७२
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