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रहीम-कवितावली।
रूप-गर्विता—
छीन, मलिन, विष-भइया, औगुन तीन।
मोहिं कह चन्द-बदनिआ, पिय मति हीन॥३५॥[१]
रातुल[२] भयसि मुगउआ[३], निरस पखान[४]।
प्रेम-गर्विता—
आपुहि देत कजरवा, गूँदत हार।
चुनि पहिराव चुनरिआ, प्रान-अधार॥३७॥
औरन पाँय जवकवा[७], नाइन दीन।
नायिकावों के और दस भेद।
१—प्रोषितपतिका।
मुग्धा-प्रोषितपतिका—
तै अब जासि बेइलिआ[८], जरि-बरि मूल।