पृष्ठ:राजा और प्रजा.pdf/६

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निवेदन

इसके पहले हमारे पाठक जगत प्रसिद्ध लेखक संघ रविंद्र नाथ टैगोर की दो निबन्ध वलियाँ स्वदेश और शिक्षा पढ़ चुके हैं। आज यह तीसरी निबन्ध वलियाँ उपस्थित की जाती है। हमारे विश्वास है कि हिन्दी के राजनीतिक साहित्य में यह एक अपूर्व चीज होगी। इसमें पाठकों को कवि-सम्राटकी सर्वतोमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन होगा। वे देखेंगे कि रवींद्रनाथ बाबू का राजनीतिक ज्ञान भी कितनी गंभीर, कितना उन्नत है। हमारी समझ में राजनैतिक के क्षेत्र में काम करने वाले को और अपे प्यारे देश की उन्नति चाहने वालों को ये निबन्ध पर प्रर्दशन का म देंगे। राजा और प्रजा के पारस्परिक संबंध को स्पष्टता के साथ समझने के लिए ऐसे अच्छे विचार शायद ही कहीं मिलेंगे। निबन्ध पुराने है, कोई कोई तो २५-२६वर्ष पहली के लिखे हुए हैं;