पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२०३

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राबिन्सन क्रूसो ।

१८२ राबिन्सन क्रूसा। फ्राइडे-यदि आप चले तो मैं भी आपके साथ साथ जाऊँगा । । मैं—अरे ! मैं चलें ? ऐसा होने से ते वे लोग मिल कर मुझे खा ही डालेंगे। फ्राइडे-नहीं, नहीं, आप ऐसा न समझे। मैं उन लोगों से आप की दया और अपने ऊपर उपकार की बात कहूँगा । उन लोगों को श्रद्धा-भक्ति करना सिखलाऊँगा । मेरे देश में जो अभी सत्रह गौराङ्ग विद्यमान हैं उनसे तेा केाई किसी तरह की छेड़-छाड़ नहीं करता। अब मेरे मन में यह धुन समाई कि समुद्रपार होकर उन सत्रह यूरोपवासियों के साथ किसी तरह भेट करनी चाहिए। उन लोगों के साथ सम्मिलित होने की वासना प्रबल हो उठी। मैंने फ्राइडे को ले जाकर अपनी डॉगी दिखलाई । हम दोनेां उस पर सवार हुए। देखा, फ्राइडे नाव खेने में पूरा उस्ताद है। मैंने कहा है-“फ्राइडे, चलो तुम्हारे देश को चलें । फ्राइडे गम्भीर भाव धारण कर चुप हो रहा । उसका अर्थ मैंने यही समझा कि इतनी छोटी डोंगी से समुद्रयात्रा करने का उसे साहस नहीं होता। मैंने कहा,-"मेरे पास एक और बड़ी नाव है। दूसरे दिन उसके वह नाव दिखाने के लिए ले गया। देख कर उसने कहा-हाँ, यह नाव बेशक बड़ी है। किन्तु बाईस-तेईस वर्ष से बे हिफाज़त ये ही पड़ी रहने से सड़ गल गई है। | तब मैंने एक और बड़ी डोंगी बनाने का संकल्प किया। मैंने कहा, “आओ, फ्राइडे, मैं तुम्हारे देश जाने का प्रबन्ध कर हूँ ।” फ्राइडे बड़ी अप्रसन्नता और अनुत्साह के साथ बोला