पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२०५

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राबिन्सन क्रूसो ।


१८४ राविन्सन क्रूसो । ही वह काम सीख लिया और बसूला तथा रुखानी के द्वारा एक ही महीने में डांगी तैयार कर ली। इसके बाद छोटी छोटी चिकनी डालों को बिछा कर उनके ऊपर से थोड़ा थोड़ा लुढ़का कर नाव को पानी पर ले जाने में और पन्द्रह दिन लगे। इस नाव में बीस आदमी मज़े में बैठ सकते थे। । यद्यपि नाव इतनी बड़ी थी ते भी फ्राइडे का इस तेज़ी से खेना देख कर मैं विस्मित हुआ। वह अब नाव खे कर मुझको समुद्र पार कर देने को राज़ी है। किन्तु नाव का कुछ और काम करना बाकी रह गया था ; मस्तूल और पाल लगाना था। मस्तूल की कमी न थी, फ्राइडे की एक सीधा सा पेड़ दिखला कर मस्तूल बनाने की रीति बता दी। अब पाल का प्रबन्ध करना बाकी रहा। मेरे पास पुराने पाल के बहुत टुकड़े थे, किन्तु इतने दिनों से वे यों ही पड़े थे। उन्हें उलट पलट कर देखा तो उनमें दो टुकड़े अच्छे निकले। उन्हीं दोनों टुकड़ों को जोड़ कर पाल बनाया। यह सब करते धरते दो महीने लगे। इसके बाद पतवार बनाई। पतवार बनाने में मुझे उतना ही परिश्रम करना पड़ा जितना एक छोटी सी नाव बनाने में करना पड़ता। अब फ्राइडे को नौका-परिचालन की शिक्षा देने का अवसर आया । फ्राइडे नाव चलाना जानता था, किन्तु वह पतवार और पाल आदि के विषय में कुछ न जानता था । कब, कैसे, इनसे काम लेना चाहिए यह फ्राइडे को बता देना ज़रूरी था । मैं स्वयं नाव खे कर फ्राइडे को सिखलाने लगा। पतवार को जिधर घुमाओ उधर ही नाव घूमेगी । लग्गी से नाव न खेने पर भी पाल के ज़ोर से नाव मज़े में चलती हैयह देख सुन कर फ्राइडे चकित हो मेरे मुँह की ओर