पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२१०

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क्रूसो के घर में नवीन अभ्यागत।

मेरी अपेक्षा फ्रा़इडे का लक्ष्य अच्छा हुआ था। उसकी गोली से दो हत और तीन घायल हुए। मेरी गोली से एक हत और दो आहत हुए थे, बाकी सब भयभीत होकर चौंंक उठे। किन्तु यह अलक्षित मृत्यु किस तरफ़ से आती है इसका कुछ निश्चय न कर वे लोग खड़े हो चकित दृष्टि से चारों ओर ताकने लगे। किस ओर भागने से बचेंगे, इसका भी कुछ अन्दाज़ उन्हें नहीं था। हम दोनों ने फिर बन्दूकें मारीं। इन बन्दूकों में छर्रे भरे थे। इस कारण अब की बार दो ही मरे। किन्तु छर्रे लगने से इतने अधिक लोग घायल हुए कि वे लोहू लुहान होकर, पागलों की भाँति चीत्कार करते हुए, इधर उधर दौड़ने लगे। थोड़ी ही देर के बाद उन घायलों में तीन मनुष्य धरती पर मूर्च्छित हो कर गिर पड़े।

इसके बाद हम दोनों भरी हुई एक एक बन्दूक लेकर झुरमुट की ओट से निकल कर बाहर आये। उन लोगों ने ज्यों ही हमारी ओर देखा त्यों ही हम खूब ज़ोर से गरज उठे। हम भारी भारी बन्दूकों को कन्धे पर रक्खे फुर्ती से दौड़ नहीं सकते थे, तथापि जहाँ तक हो सका तेज़ी से जाकर बन्दियों के पास पहुंचे। जो बन्दियों को लाने गये थे वे दोनों आदमी तथा तीन व्यक्ति और डर कर नाव की शरण लेने जाते थे। मैंने फ्राइडे से कहा-“मारो उन लोगों को।" फ्रा़इडे पूर्ण साहस कर के उन लोगों की ओर कुछ दूर तक और दौड़ गया; तब तक असभ्यगण नाव पर सवार हो चुके थे और भागने का उद्योग कर रहे थे। इसी बीच फ्रा़इडे ने दो ही गोलियों में उन लोगों का काम तमाम कर दिया।

इस अरसे में मैंने अपनी बुरी निकाल कर बन्दी के हाथों-पैरों का बन्धन काट डाला और पोर्चुगीज़ भाषा में पूछा,-