पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२११

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राबिन्सन क्रूसो ।


"आप कौन हैं?" उन्होंने लैटिन भाषा में उत्तर दिया,-"मैं किरिस्तान हूँ।" उत्तर तो उन्होंने दे दिया पर भूख-प्यास से वे ऐसे व्याकुल थे कि भली भाँति बोल नहीं सकते थे। मैंने झट अपनी जेब से दूध-रोटी निकाल कर उनको खाने के लिए दी। तब फिर मैंने पूछा-"आप किस देश के रहने वाले हैं?" उन्होंने कहा-"स्पेन के।" फिर उन्होंने अपने आकार इङ्गित और चेष्टा से मुझे कृतज्ञता सहित अनेक धन्यवाद दिये। मैंने टूटी-फूटी स्पेनिश भाषा में कहा,-"महाशय, परिचय पीछे होगा, अभी युद्ध जारी है। यदि आपसे हो सके तो यह पिस्तौल और तलवार लीजिए, तथा शत्रुओं का विनाश कीजिए।" हथियार पाते ही मानो उन्हें नवजीवन मिल गया। उनका उत्साह और साहस सौगुना बढ़ गया। उन्होंने बड़े वेग से जाकर दो दुश्मनों को तलवार से दो टुकड़े कर डाला। असभ्यगण अतर्कित भाव से आक्रान्त होकर भय और आश्चर्य से किंकर्तव्य-विमूढ़ हो रहे थे। कितने ही मर कर गिरने लगे और कितने ही भय से मूर्च्छित होकर गिरने लगे।

मैंने अपनी तलवार और पिस्तौल स्पेनियर्ड को दी थी। इससे मैंने अपनी भरी हुई बन्दूक़ को विशेष आवश्यकता के लिए रख छोड़ा था। मैंने फ़्राइडे को पुकार कर कहा-झुरमुट की आड़ से और दो बन्दूक़ें ले आओ। वह वायु-वेग से दौड़ कर ले आया। मैं उसको अपनी बन्दूक़ देकर दूसरी भरने लगा। फ़्राइडे से कह दिया कि बन्दूक़ खाली हो जाने पर मुझको दे देना और भरी हुई ले लेना। मैं बन्दूक़ भर ही रहा था कि एक असभ्य वीर ने हाथ में काठ की तलवार लेकर स्पेनियर्ड पर आक्रमण किया। स्पेनियर्ड दुर्बल होने पर भी खूब साहसी