पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२४८

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1 सी का स्वदेशप्रत्यागमन और धनलाभ । २२५ . जारी करा दिया और वह एक जिलगामी परिचित महाजन के हाथ वहाँ के भेज दिया। सात महीने के भीतर ही मैंने इंजिल से अपने कार पर- दाज का प्रेमसूचक पत्र और अपनी सम्पत्ति का हिसाब पाया । मैं अब तक जीता हूँ, यह चुन कर सभी ने खूब आनन्द प्रकट करके चिट्ठी लिखी थी । मेरी सम्पत्ति का मोटा हिसाब यही था कि मेरे अंश का कुल पचहत्तर हजार रुपया जमा है । उन लोगों ने बड़े आदर से एक बार मुझे ज़िल आने को लिखा था। उन लोगों ने बाघ का चमड़ा पाँच अदद, एक सन्दूक भर मिठाई और एक सौ अशर्फियाँ उपहार में भेजी थीं। एक हजार दो सौ बस चीनी, आठ सौ बोझे तम्बाकू और बाकी नकद रुपया भेज कर उन्होंने मेरा हिसाब चुकता कर दिया। एक साथ जब मुझे इतना धन मिला तब मेरा हृदय आानन्द के आवेग के हाथों उछलने लगा । मैं इस आशातीत आनन्दोड्स से विह्वल हो गया । यदि मेरे परमबन्धु वृद्ध कप्तान मेरी हिफ़ाज़त न करते तो आनन्द से मेरा हृदय फट जाता । तब भी मैं बहुत दिनों तक अस्वस्थ रहा , यहाँ तक कि मुझको देखने के लिए डाकृर बुलाये गये थे। एकाएक मैं पचहत्तर हजार रुपये का मालिक बन बैठा। इसके अलावा मंजिल में सालाना पन्द्रह हजार रुपये मुनाफे को जमीदारी ! मैं इतना रुपया लेकर क्या करेगा, इसका कुछ निर्णय नहीं कर सकता था । सब से पहले मैंने अपने परम बन्धु वृद्व कप्तान की अभ्यर्चना की जिन्होंने पहले मेरे प्राण बचाये और आखीर तक मेरे साथ सद्व्यवहार किया । पहले उनका सत्कार करना चाहिए था । मैंने उनके आगे अथना १५