पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/२८१

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राबिन्सन क्रूसो ।

२८ राबिन्सन क्रस । लोगों को न्यू फौन्डलेन्ड के किनारे उतार दिया। सभी लोग उतर गये । केवल वह युवा पुरोहित हम के साथ भारत लोगो जाने का रह गया और चार व्यक्ति नाविक का काम करने की इच्छा से हमारे जहाज पर नियुक्त हुए। इसके बाद बीस दिन तक हम लोग अमेरिका के द्वीपशु के सामने ले जाने लगे । एक दिन फिर एक घटना के कारण परोपकार का सुयेाग मिल गया । उस दिन मार्च की उन्नी सवीं तारीख थी । हम लोगों ने देखा कि एक जहाज के सभी मस्तूल टूट हैं, उसके जहाजिर्यों ने विपत्ति के संकेतस्वरूप तोप की आवाज की । हम लोग उसके पास गये । वह जहाज ढंगतेन्ड के ब्रिस्टल शहर को जा रहा था । रास्ते में सख्त तूफान आने के कारण उसकी ऐसी दुर्दशा हुई। थी । जहाज़ इस प्रकार आका-भाजन होकर नौ सप्ताह से समुद्र में इतस्ततः घूम रहा था । उन लोगों के पास खाद्य सामग्री भी न थी । निराहार रहने के कारण वे मृतप्राय हो रहे थे । एक मात्र जीवन का अवलम्ब यही था कि पानी बिलकुल ख़र्च न हुआ था। आधा पीपा मैदा था और कुछ चीनी थी । उस जहाज़ पर एक युवक यात्री था । उसके साथ उसकी माता और दासी भी थी। उसके पास खाने को कुछ न था, खाद्य वस्तु बिलकुल निबट चुकी थी । नाविक गण स्वयं खाद्य के अभाव से कष्ट पा रहे थे इस लिए उन पर दया कर के कोई कुछ खाने को न देता था । इससे उन तीनों की अवस्था अत्यन्त शोचनीय हो गई थी । मैंने झट पट पहले उनके खाने की व्यवस्था कर दी। ने अपने भतीजे के एकदम दबा रक्खा था। वह मेरी आशा