पृष्ठ:राबिन्सन-क्रूसो.djvu/४०४

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क्रुसो का स्थलमार्ग से स्वदेश को लौटना ।

क्र का स्थलमार्ग से स्वदेश को लौटना । ३७७ कारी को पकड़ कर भेज दिया तब तो अच्छा ही है, नहीं तो ‘ सबके सब मारे जाओगे । यह खबर सुन कर हम लोगों के दल में खलबली मच गई । सभी लाग परस्पर एक दूसर का मुँह देखने लगे । दल में किसने ऐसा काम किया है ? " किसके चेहरे पर अपराध का चिह्न झलकता है ? यह कौन जान सकता है ? हम लोगों के सदर ने कहला भेजा कि हमारे दल में किसीने ऐसा काम नहीं किया । इस बात से वे लोग सन्तुष्ट न होकर आक्रमण का उद्योग करने लगे। हमारे दल का एक आदमी, रूस कशासनकता के दूत का स्वाग धारण कर, ध्रुद्ध ग्रामवासियों के पास जाकर बोलाअसली अपराधी का पता लग गया । वह पीछे की ओर भाग गया है। उसकी बात पर विश्वास करके ग्रामवासी पीछे की ओर दौड़ पड़े । हम लोग झगड़े से बच कर आगे बढ़ चले। रास्ते में एक लम्बा चौड़ा बालू का मैदान मिला । उसके ि पार होने में पूरे तेईस दिन लगे। इस मरुभूमि में पेड़पौधे,” 5 ज और पानी कहीं कुछ नहीं था । गाड़ी पर पानी लाद लिया गया था । इसीसे लोगों के प्राण बचे। हम लोग क्रमशः यूरोप के निकटवर्ती होने लगे । इन देशों - में भी कितने ही लोग देखने में आये । पर सभ्यता उन लोगों में भी न थी । वे लोग भी मूतिपूजक थे, चमड़े की पोशाक पहनते थे। पोशाक देखकर कोई नहीं समझ सकता था कि उनमें कौन पुरुष है और कौन स्त्री । स्त्रियों के चेहरे पर ज़रा भी लावण्य था कोमलता नहीं झलकती थी। देश जब बर्फ से. ढक जाता था तब ये लोग मिट्टी के नीचे गुफा बनाकर रहते थे। 1.