पृष्ठ:लखनउ की कब्र - किशोरीलाल गोस्वामी.pdf/४

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उपोद्घात ।। लियुगपाचावल, मदापुरुषोत्त, शारथ, - श्रीराचजी के छोटे भाई लक्ष्मी के अधिकार मुक्त होने से मधुर लय का भूभन्न अङ्ग : सूबेदारों के समय में खनऊ इलायर । भूगोल के नशे में यह ( लाऊ, शहर हे मी उद के हि किन घर २६०-१२। के अध्य लिइल हैं परन्तु अब कुछ ! सर्दी के उस का भी इसी में मिला लिया गया है । ( १ ) अक्षय की राजधानी लक्ष्मऊ, ल व अधिकं हुए, जब्द सिङहोला ॐ तख्त पर इन के बद से अधिक सिद्ध हुए । आज कल हुई पर यह मुदा हैं, वृहिले च ९२ ६४ ग , शे कुछ २ पत। अब उनके नाम पर बने हुए कई पक्षों से लता है और विशेष & पुराने कागज़ाल से दी जा सके हैं । पहिले इस अगर ॐ दालों और का इ ई उ थी, र ११६०ई० में इ ३ ॐ ॐ ४ ३ की ए के साथ शेज घराने के झुललाई ३ झर इसे वर ॐ मः दै कला और करे रे ये अब में फल ३३

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११. कई कोई खलल नस की उसे लखना अहीर के नाम ३ कर बतलाते हैं, जिए अच्छीभवन' नाक किला बस्थे , र अइ ३ सिराई है। लखनऊ लक्ष्मणपुर ( खजुर )का अपञ है। क्योंकि लग (या किना बढीभवन के सुनने के बहुत पहले से * * इनाम लि है !