पृष्ठ:विनय पत्रिका.djvu/८२

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विनय-पत्रिका काम, क्रोध, मद आदि कमलोके वनको नष्ट करनेके लिये तुषार (पाला) हैं; लोभरूपी अत्यन्त मतवाले गजराजके लिये वनराज सिंह और भक्तोंकी भलाईके लिये राक्षसोंको मारकर संसारका भार उतारने- वाले हैं।॥ ४॥ जिनका नाम केशव है, जो क्लेशोंके नाश करनेवाले हैं, ब्रह्मा और शिवसे जिनके चरणयुगल वन्दित होते हैं-जो गङ्गाजीके उत्पत्तिस्थान हैं। सदा आनन्दके समूह, मोहके विनाशक और भयानक भव-सागरके पार जानेके लिये जहाज हैं ॥५॥ श्रीरामजी शोक और संशयरूपी मेघोंके समूहको छिन्न-भिन्न करनेके लिये वायुरूप और पापरूपी कठिन पर्वतको तोड़नेके लिये वज्ररूप है। जिनका अनुपम नाम संतोंको कामधेनुके समान इच्छित फल देनेवाला तथा शान्तिदायक और कलियुगके भारी पापोंको नाश करनेमें सानी नहीं रखता ॥६॥ यह श्रीरामनाम धर्मरूपी कल्पवृक्षका बगीचा, भगवान्के धाममें जानेवाले पथिकोंके लिये पाथेय तथा समस्त साधन और ' सिद्धियोंका मूल आधार है। भक्ति, वैराग्य, विज्ञान, शम, दम, दान आदि मोक्षके अनेक साधन सभी इस रामनामके अधीन हैं ॥ ७॥ जिसने इस कराल कलिकालको देखकर नित्य-निरन्तर श्रीरामनामरूपी निर्दोष अमृतका पान किया-उसने सारे तप कर लिये, सब यज्ञोंका अनुष्ठान कर लिया, सर्वस्व दान दे दिया और विधिके अनुसार सभी वैदिक कर्म कर लिये ॥ ८॥ अनेक चाण्डाल, दुष्कर्मी, भील और यवनादि केवल रामनामके प्रचण्ड प्रतापसे श्रीहरिके परमधाममें पहुँच गये और उनकी बुद्धिको विकारोंने स्पर्श भी नहीं किया । हे तुलसी- दास ! सारी आशा और भयको छोड़कर ससाररूपी बन्धनको काटनेके लिये पैनी तलवारके समान श्रीराम-नामका सदाजप कर ॥९॥