पृष्ठ:विनय पत्रिका.djvu/८६

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विनय-पत्रिका शंभु,शिव,रुद्र,शंकर,भयंकर,भीम,घोर, तेजायतन,क्रोध-राशी अनँत,भगवंत-जगदंत-अंतक-त्रास-शमन, श्रीरमन भुवनाभिरामं । भूधराधीशजगदीश ईशान, विज्ञानधन, ज्ञान-कल्यान-धामं ॥२॥ वामनाव्यक,पावन,परावर,विभो,प्रकट,परमातमा प्रकृति-स्वामी। चंद्रशेखर शूलपाणि, हर, अनघ, अज,अमित, अविछिन्न,वृषभेश- गामी ॥३॥ नीलजलदाभ तनुश्याम, बहु काम छविरामराजीवलोचन कृपाला कंवु-कर्पूर-वपु धवल, निर्मल, मौलि जटा, सुर-तटिनि, सित सुमन माला ॥ ४॥ वसनकिजल्कधर, चक्र-सारंग-दर-कंज-कौमोदकी अति विशाला। मार करि-भत्त-मृगराज, नैन,हर, नौमि,अपहरणसंसार-जाला ॥ कृष्ण,करुणाभवन,दवन कालीय खल, विपुलकंसादि निवेशकारी । त्रिपुर-भद-भंगकर,मत्तगजचर्मधर,अन्धकोरग-असन पन्नगारी॥ ब्रह्म, व्यापक, अकल, सकल, पर परमहित, ग्यान, गोतीत, गुण- वृत्ति-हर्ता। सिंधुसुत-गर्व-गिरि-वज्र, गौरीश, भव, दक्ष-मख अखिल विध्वंसक ॥ ७॥ भक्तिप्रिय, भक्तजन-कामधुक धेनु, हरि हरण, दुर्घट विकट विपत्ति भारी। सुखद, नर्मद, वरद, विरज, अनवद्यऽखिल, विपिन-आनंद- वीथिन-विहारी ॥ ८॥ रुचिर हरिशंकरी नाम-मंत्रावली द्वंद्वदुख हरनि, आनंदखानी । विष्णु-शिव-लोक-लोपान-सम सर्वदा वदति तुलसीदास विशद वानी ॥९॥ - [इस भजनके प्रत्येक पदमे आधेमें भगवान् श्रीविष्णुकी और